भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) दिनेश कुमार ने मंगलवार को रबी विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जंगीपुर मंडी स्थित विपणन शाखा गेहूं क्रय केंद्र एवं भारतीय खाद्य निगम डिपो का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान रामगोपाल यादव (विपणन निरीक्षक), नेहा कुशवाहा (टीए-2, भा0खा0नि0), ज्योति प्रकाश त्रिपाठी व हनुमान यादव (क्षेत्रीय विपणन अधिकारी) तथा अनुराग पाण्डेय (जिला खाद्य विपणन अधिकारी) मौजूद रहे।
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
नहर में पानी नहीं छोड़ जाने से किसान परेशान
ज़मीन मिलने के बाद विमला ने अपनी जरूरतों और नए तरीकों को अपना कर खेती का नक्शा ही बदल दिया है- क्योंकि अब वह सिर्फ मज़दूर नहीं, एक किसान है। इस विषय पर आप क्या सोचते हैं, महिलाएं अपने हक को कैसे हासिल कर सकती हैं. क्या आप नहीं चाहते की आपके आस पास विमला जैसी कई महिलाएं हों? मुझे उम्मीद है कि आप निश्चित देखना चाहते हैं. तो आप हमें बताइये आप अपने इलाके में कैसे अनेकों विमलाएं बनाएंगे उनको उनका भूमि अधिकार देकर आपकी राय इसके उलट भी हो सकती है. इसलिए पक्ष-विपक्ष के इस कार्यक्रम में अपनी राय ज़रूर रिकॉर्ड करें हमें बताएं कि आप इस मसले पर क्या सोचते हैं. राय रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं अपने फोन से तीन नंबर का बटन दबाकर या फिर मोबाईलवाणी के जरिए.
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किसान खेतों में नहीं जलाएं परली उमेश कुमार
किसानों को नैनो अवर को के उपयोग पर दिया जोर
नदी का पानी रुकावट से किसने की फसल हो रही है खराब
किसान यूनियन के तहसील भानु प्रताप
