कृषि अनुसंधान व शिक्षा विभाग (डेवर) के पूर्व सचिव प्रो. पंजाब सिंह ने कहा की किसान नहीं तो इंसान नहीं है। किसानों के माध्यम से ही मानवता को जिंदा रखा जा सकता है। किसानों की आय बढ़ाने की भी जरूरत है, जिसमें फार्मर प्रोड्‌यूसर कंपनियां की बड़ी भूमिका निभा सकती है। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान शाहंशाहपुर में आयोजित तीन दिवसीय क्षेत्रीय कृषि मेला के समापन समारोह में पहुंचे डॉ. पंजाब सिंह ने आयोजन के लिए आईआईबीआर की प्रशंसा की। बीएचयू में कृषि विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. शिवराज सिंह ने कृषि अभियांत्रिकी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा माइनिग आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस आदि के जरिये युवा किसानों को जोड़ने का प्रयास कर रहे है। एपीडा के आनंद कुमार ने कृषि निर्यात की संभावनाओं व सरकारी नीतियों की चर्चा की। प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके गुप्ता ने उन्नत उत्पादन की तकनीक बताई। प्रगतिशील अनुभव साझा किए और खुद ही अपने खेतों पर ही बीज उत्पादन करते हुए कृषि लागत कम करने के लिए प्रेरित किया। आईआईवीआर के निदेशक डॉ. तुषार कांति बेहेरा ने बताया कि तीन दिनों में यूपी, बिहार, झारखण्ड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, ओड़िसा व छत्तीसगढ़ सहित 7 राज्यों से नौ हजार से अधिक किसानों ने मेले में भागीदारी की। जिसमें महिलाओं की संख्या तीन हजार से अधिक रहीं।