सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।
टीबी बीमारी को क्षयरोग के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाया जाता है। टीबी एक गंभीर बीमारी है जिसे लेकर आज भी लोगों के बीच कई सारी अफवाह फैली हुई हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन इस दिन दुनिया भर में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित करता है ताकि लोग इसके प्रति जागरूक हो। हर साल विश्व क्षयरोग दिवस एक निर्धारित थीम के तहत मनाया जाता है। अभी 2024 की थीम यस! वी कैन एंड टीबी! इस थीम का उद्देश्य है टीबी उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना। मरीज़ों और उनके परिवारों को प्रेरणा देना की टीबी का जड़ से उपचार संभव है और वह हार न मानें। टीबी का खात्मा हम सब मिलकर कर सकते हैं। इसलिए हमें इससे बचने के लिए विभिन्न उपाय करने चाहिए जैसे टीकाकरण संतुलित आहार लेना और एक्टिव लाइफस्टाइल को शामिल करना चाहिए ।खांसते और छींकते समय चेहरे को साफ नैपकिन या रुमाल से कवर करना और इस्तेमाल के बाद इन चीजों को कूड़े में डाल देने की आदत अपनाने चाहिए ।तो दोस्तों हमें अपनों और खुद का ख्याल रखना है और टीबी से बचाव के उपाय को अपनाना है तभी तो हम टीबी को हराएंगे और देश को जिताएंगे।
नमस्कार मैं बिहार के औरंगाबाद से ऋषि मोबाइल वानी पर आज एक बिहार की प्रसिद्ध रेसिपी के बारे में बताने जा रहा हूं जो खाने में स्वादिष्ट तो है ही लेकिन स्वास्थ्य के लिये भी काफी फायदेमंद है। इससे त्वचा की कोई बीमारी नहीं होती है तो आईए जानते हैं इसके बारे में रसिया बिहार में काफी लोकप्रिय है। इसे बिहार के लोग बड़ी शौक से बनाते और खाते हैं। गुड़ और चावल से बनाई जाने वाली खीर को रसिया कहते हैं इसे रोटी या पूरी के साथ सर्व किया जाता है। आइए जानते हैं इसे बनाने के सही तरीके के बारे में इसे बनाने के लिए हमें चावल (80 ग्राम) गुड़ (150 ग्राम) फुल क्रीम मिल्क - 1 लीटर बादाम - 8-1 काजू - 8-10 किशमिश - 2 टेबल स्पून इलायची - 5-6 चाहिए। रसिया यानी गुड़ की खीर बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में दूध उबालने के लिए रख दीजिए। इसके साथ ही सूखे मेवों को बारीक टुकड़ों में काट कर तैयार कर लीजिए। इसके साथ ही आधा कप चावल साफ करके धोकर 2 घंटे के लिए पानी में भिगो कर रख दीजिए।दूध में उबाल आने पर चावलों को दूध में डाल कर मिला दीजिए। दूध को चम्मच से चलाएं और खीर में उबाल आने के बाद गैस को धीमा कर दें। खीर को हर 1-2 मिनट में चलाते रहें ताकि वो बर्तन के तले पर न लगने पाएं। दूसरे बर्तन में ½ कप पानी और गुड़ डाल कर गैस पर रख लें। जब गुड़ पानी में पूरी तरह से घुल जाए तो गैस बंद कर दें। जब चावल मुलायम हो जाएं तब खीर में काजू, किशमिश और बादाम डाल दें। चावल जब दूध में अच्छे से मिल जाए तो उसमें इलायची पाउडर डाल दें। खीर के ठंडा हो जाने पर, गुड़ का घोल छलनी से छान कर खीर में मिला दें। खीर बनकर तैयार है।दूध में चावल डालने के बाद उसे हर 1-2 मिनट में चलाते रहें, ताकि खीर बर्तन के तले से न लगे।गुड को खीर में ठंडा होने के बाद ही डालें क्योंकि गरम खीर में गुड़ डालने पर दूध फट सकता है। धन्यवाद
बिहार राज्य के जमुई जिले से संजीवन कुमार ने मालपुआ कैसे बनाते हैं इसके बारे में जानकारी बताया
सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की क्षमता बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार कहानी, तो रिकॉर्ड करें फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा मछली पालन से जुड़ी जानकारियाँ दे रहे है कि किसानों को किस तरह मछली के स्वास्थ्य का ध्यान रखना है । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
दहेज में परिवार की बचत और आय का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है. वर्ष 2007 में ग्रामीण भारत में कुल दहेज वार्षिक घरेलू आय का 14 फीसदी था। दहेज की समस्या को प्रथा न समझकर, समस्या के रूप में देखा जाना जरूरी है ताकि इसे खत्म किया जा सके। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आपके क्या विचार है ? *----- आने वाली लोकसभा चुनाव में दहेज प्रथा क्या आपके लिए मुद्दा बन सकता है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?
दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।
जल ही जीवन है। यह पंक्तियाँ हम बचपन से सुनते आ रहे हैं। आज के समय में जब दुनिया शुद्ध जल की कमी से जूझ रही है, यह पंक्तियाँ और सार्थक हो जाती हैं। भारत में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई राज्य हैं जो भूजल की कमी के चरम बिंदु को पार कर चुके हैं। हर साल 22 मार्च के दिन विश्व जल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमारे जीवन में जल के महत्व और उसके संरक्षण को समर्पित है।इस विश्व जल दिवस पर पानी की बर्बादी को रोके और जल को प्रदूषित होने से बचाये। मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की ओर से आप सभी को विश्व जल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
