जिला मुंगेर,से बिपिन कुमार जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है की "सिंचाई योजना जैसे-तैसे" हमारे देश के किसान बदहाली का शिकार है आखिर किसान करे भी तो क्या करे। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण आकड़े अनुसार हर दो में से एक किसान कर्ज लिए हुए है लगातार कर्ज के बढ़ने से किसानों के आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ रही है। बैंकों द्वारा किसानों को आसानी कर्ज मुहैया नहीं कराया जाता है जिस कारण उन्हें सूदखोरों से अधिक ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। सूखे जैसी प्राकृतक आपदा के कारण किसानों द्वारा खेती पर खर्च की गई राशि भी प्राप्त नहीं हो पाती है। सरकार द्वारा सिचाई योजना योजना पर करोड़ो रुपये खर्च किये गए है लेकिन धरातल पर योजना की स्थिति कुछ और ही है। अधिकतर सिंचाई योजना पर ठेकेदारी के अलावा कुछ नहीं हुआ। सिंचाई योजना को जैसे तैसे पूरा कर पैसे की निकासी कर ली गई है| दोस्तो अाप भी अपने विचार और अनुभव हमारे साथ बाँटना चाहते है तो मिस्ड कॉल करे निशुल्क नंबर -08800984861 पर