बिहार राज्य के जमुई जिला गिद्धौर प्रखंड से संजीवन कुमार मोबाइल वाणी के माधयम से कहते हैं कि बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है।अभी आने वाला समय मौसम परिवर्त्तन का ही है।इसके साथ ही दीपावली भी नजदीक है।जिसमें आतिशबाजी से प्रदूषण का खतरा भी बढ़ जाता है।ऐसे में अस्थमा की शिकायत हो सकती है या बढ़ भी सकती है।हर साल अस्थमा के मरीज बढ़ते जा रहे हैं।यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है।इस रोग से फेफड़े प्रभावित हो जाते हैं।यह रोग अगर हो जाये तो हमेशा इस समस्या से जूझना पड़ता है।इलाज से आराम तो मिल जाता है,लेकिन उसे भी ज्यादा जरुरी होता है सचेत रहना। अस्थमा की बीमारी मौसम बदलाव के अलावे किसी चीज़ से एलर्जी,धुल-प्रदूषण,किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी से हो जाती है।अस्थमा से बचाव के लिए धुल और प्रदूषण से बचना चाहिए।ऐसे स्थान पर मास्क या रुमाल का प्रयोग कर अपने नाक और मुँह को ढ़क कर रखना चाहिए।अस्थमा का अटैक आने पर घबराना नहीं चाहिए।मुँह से लम्बी-लम्बी साँस लेना और छोड़ना चाहिए।गर्म पानी पीना चाहिए।विक्स लगाना चाहिए।आराम करने और इन्हेलर की मदद से भी अस्थमा के अटैक से राहत मिल सकती है।इसके बाद डॉक्टर से भी जरूर परामर्श लेना चाहिए।
