बिहार राज्य के जमुई जिला सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा जानकारी साझा करते हुए कहते हैं कि आजकल प्रसव के समय निजी अस्पतालों में बच्चा फँस गया है ,जोखिम नहीं ले सकते या अन्य ऐसे कई बहाने जिनसे परिजनों को भ्रमित कर उन्हें प्रसव के लिए सिजेरियन ऑप्रेशन की सलाह डॉक्टर बहुत आसानी से दे देते हैं।ऐसा करने के पीछे एक मात्र कारण डॉक्टरों का अपना मुनाफा होता है।वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में देखा जाए तो अधिकत्तर बच्चे नॉर्मल प्रसव द्वारा ही होते हैं।मात्र 11 % बच्चे सिजेरियन ऑप्रेशन से सरकारी अस्पताल में होते हैं,वहीं निजी अस्पतालों में यह आँकड़ा 55 % से भी अधिक होता है।एक सर्वे के अनुसार यह रिपोर्ट सामने आई है की 2016-2017 में हर दूसरा बच्चा सिजेरियन ऑप्रेशन से ही जन्म लिया है।जबकि कई स्वास्थ्य संगठनो का भी यही मानना है की किसी भी देश में 15 % से अधिक सिजेरियन ऑप्रेशन नहीं होना चाहिए।निजी अस्पतालों के इस व्यवसाय पर जल्द से जल्द रोक लगाने की जरुरत है।
