आज जिस रफ़्तार से देश में सड़कों का विकास हुआ है कहीं उससे ज्यादा तेजी से देश में वाहनों की संख्या में इजाफ़ा हुआ है। आज स्थिति यह कि हर घर में कई वाहन मौजूद होते हैं ऐसे में आज हमारे लिए पेट्रोल और डीजल का होना अति आवश्यक है।लेकिन देश में अन्धाधुन्ध तरीके से बढ़ती पेट्रोल व डीजल की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है और यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिरकार वर्तमान सरकार की नई ईंधन नीति उद्योगपतियों की मदद करने के लिए है या साधारण व्यक्ति की सहायता के लिए। अर्थशास्त्र के शब्दों में कहें तो अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से किसी भी देश के घरेलू बाज़ार में पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ते हैं। लेकिन वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटने के ,बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है? आखिर पेट्रोल और डीजल इतने महंगे क्यों हैं? साथ ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद जनता की भलाई करने की बात करने वाले राजनेता से लेकर अर्थशास्त्री तक आखिर क्यों चुप हैं? कब तक आम जनता इस बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दाम के बिच पिसती रहेगी ? क्या सरकार को इस पर ध्यान देने की जरुरत नहीं है ? दोस्तों ,आपके अनुसार सरकार को ऐसी क्या कदम उठानी होगी जिससे आम जनता को बढ़ते पेट्रोल और डीजल के कीमत से थोड़ी राहत मिल सके ?