अच्छा जीवन जीने की चाह हर किसी को होती है। और इसी चाह को पूरा करने के तलाश में लाखों मज़दूर हर साल अपने घर को छोड़ अन्य राज्य में जाते है। हमारा बिहार भी इससे अछूता नहीं है। सरकार द्वारा रोजगार को बढ़ाने के लियें मजदूरों के मजदूरी में वृद्धि, उनकी प्रस्थिति में सुधार, श्रम संघों के विकास, श्रमिकों की समस्याओं और श्रम कानूनों को लागू करने के बावजूद अभी भी मजदूरों का पलायन नहीं रुका है। श्रोताओ, आखिर क्या वजह है की सरकार द्वारा मजदूरों की रक्षा के लिए न्यूनतम मजदूरी कानून का निर्माण करने के बावजूद मजदूरों का पलायन विफल साबित हो रहा है ? क्या इस कानून को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन के आलावा आमलोगो की मानसिकता में बदलाव लाने की जरुरत है? क्या इस बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार मजदुरो के हितों की रक्षा कर रही है ,ताकि मजदुर अपना जीवंन-यापन अपने ही राज्य में आसानी से कर सके ?
