चक्रवर्ती जी कानपूर विहार से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि घरेलु हिंसा हमारे समाज में बहुत ही कठोर है जो कि हर घर की कहानी है। घरेलु हिंसा के कारण हमारे समाज में छोटे बच्चे ठीक से पढ़ नहीं पाते हैं और इसके कारण उनमें बहुत सी बुराइयाँ व्याप्त हो जाती हैं जैसे चोरी। घरेलु हिंसा में महिलाओं के साथ अनेक प्रकार की प्रताड़ना होती है। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि पति दिन में घर से बाहर रहता है और शाम में शराब पी कर घर लौटता है लेकिन उसे घर के हाल के बारे में कुछ भी पता नहीं होता कि घर में क्या खाने के लिए है या नहीं तो औरत कहाँ से खाने पिने का इंतेज़ाम करेगी क्योकि औरत तो घर से बहार जाती नहीं काम करने और औरत घर के काम करती है इसलिए घरेलु हिंसा बहुत ही कठिन है साथ ही बच्चे भी छोटे छोटे होते हैं और वे भी बुरी संगत में आकर बिगड़ जाते हैं जिस कारण वे पढ़ भी नहीं पाते। घरेलु हिंसा को जल्द से जल्द ख़त्म किया जाये
