नमस्कार आदाब श्रोताओ आने वाले सप्ताह में जनता की रिपोर्ट चर्चा मंच पर हम बात करेंगे देश में हो रही पत्रकारों की हत्या के बारे में . श्रोताओ भारत में 1992 से अबतक लगभग 100 पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी हैं, सवाल यह नहीं कि कितने मामलों में इन्साफ मिला और कितने अपराधियों को माफ़ी मिल गई, सवाल यह है कि वैसे सैकड़ों आहत परिवार की तरह और कब तक इस लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की हत्याएं होती रहेंगी? क्या इन पत्रकारों की हत्या बिहार में जंगल राज के वापसी का ऐलान है ? पत्रकारिता जगत अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की हत्या है, आखिर इसकी रक्षा कौन करेगा? क्या पत्रकारिता की दुनिया के लिए यह काले दिन हैं, जब बुलेट से कलम का कत्ल किया जा रहा है ? आखिर इन हत्याओं के लिये हम कब तक केवल निंदा और श्रद्धांजलि देते रहेंगे? श्रोताओ क्या आप मानते है कि पत्रकारों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है? जनता की रिपोर्ट चर्चा मंच पर भाग लेकर हमारे साथ साँझा करे इस मुद्दे पर अपनी राय नंबर 3 दबाकर।
