भारत के कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में जो पार्टी सत्ता तक पहुंचा है वह लोक लुभावने नारे एवं योजनाओं पर अधिक फोकस किया साथ ही साथ धर्म और संप्रदाय को भी उसमें जोड़ा जिसके कारण वहां की जनता ने उन पार्टी को बहुमत की ओर धकेल दिया वैसे लोकतंत्र के इस महापर्व में जातिवाद संप्रदायवाद भेदभाव से ऊपर उठकर वोट करने की जरूरत है ताकि क्षेत्र का विकास एवं राज्य का विकास हो सके