भारत के किसी भी राज्यों में जब-जब भी चुनाव होता है तब तक चुनाव हिंसा के साथ ही संपन्न होता है क्योंकि हमारे देश की सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो दोनों राजनीतिक पार्टियों अपने कार्यकर्ताओं के दिमाग में ऐसी भावना भर देता है जिसके कारण विरोध एक दूसरे के प्रति बढ़ जाता है और वह विरोध चुनाव आते-आते हिंसा में बदल जाता है भारत के लोकतंत्र में हिंसा अश्वनीय और जो भारतीय वॉटर या जनता जिसके अंदर बुद्धि है ज्ञान हो वह कभी इन सब चीजों से दूर रहता है लेकिन राजनीतिक पार्टियों धर्म संप्रदाय जातिवाद आदि को बढ़ावा देकर हिंसा का रूप धरण करवा देता है और इसमें निर्दोष कार्यकर्ता मौत का कारण बन जाता है और कोई राजनीतिक पार्टियों चुनाव के बाद फिर उसे देखने तक नहीं आता है