जमुई जिले भर में जगह-जगह लोक आस्था का महापर्व चैती छठ श्रद्धा के साथ मनाया गया। सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्ध्य अर्पित किया गया। छठ व्रती श्रद्धालुओं ने घाटों पर पहुंच कर अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। लोक आस्था का महापर्व छठ वर्ष में दो बार मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाये जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। पारिवारिक सुख-समृद्धि मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। स्त्री पुरुष समान रूप से इस पर्व को मनाते हैं। छठ व्रत के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं। उनमें से एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब श्री कृष्ण द्वारा बताए जाने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। तब उनकी मनोकामनाएं पूरी हुईं पांडवों को राजपाट वापस मिला। मंगलवार की सुबह उदीयमान भगवान को अर्ध्य देने के साथ लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व का समापन होगा।