मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से अमोल सुरजी गुरबे साझा मंच के माध्यम से अंतरास्ट्रीय मानव के उपलक्ष में अमोल जी उन बच्चों के बारे बात कर रहे है जो पढ़ना -बढ़ना चाहते है और अपने जीवन में कुछ करना चाहते है। जिनका आशियाना सड़क पर है।ये बच्चे फुटपाथ पर किसी का इंतिजार करते रहते है की कोई रोटी लेकर आएगा तो कोई किताब।इन्ही आशाओं में जीते है।हमारे भारतीय सविंधान में बच्चों के शिक्षा का अधिकार, भरण-पोषण का अधिकार का आज भी हनन हो रहा है। सरकार देश को डिजिटल बनाने में है।देश में प्राथमिक शालाएं, मिडिल शाला, आंगनबाड़ियों में बच्चों मेन्यू के अनुसार भोजन मिल रहा है ? ऐसी बहुत सी बातें है जो हम दैनिक अखबार या टीवी चैनल में देखते है।आज यदि सरकारी नेता, अभिनेता और अधिकारी जो कार्य नहीं कर सकते है वो हमारा भारत का नागरिक, शहर का नागरिक, गाँव का नागरिक और हमारा समाज कर सकता है। हम मानव दिवस पर संकल्प ले की हमे अपना कुछ समय उन बच्चों के लिए समर्पित करना चाहिए ताकि उन बच्चों को अच्छा लगेगा और ख़ुशी मिलेगी।
