प्राइवेट स्कूल कॉलेज में किताब और कॉपियों के नाम पर मनमाना फीस लिया जा रहा है और हर वर्ष इसे बदल दिया जाता है सबसे असुविधा उन गरीब अभिभावकों की होती है जो अपने बच्चों को प्राइवेट और इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं? परंतु बड़े-बड़े स्कूल तो हर साल अपनी कॉपी किताब चेंज कर देते हैं परंतु जो छोटे प्राइवेट स्कूल होते हैं वह भी उनका दिखा देखी हर साल किताबों को बदल देते हैं और उनसे उसका मनमाना फीस लेते हैं जो किताब मार्केट में उसके आधे से भी कम दाम में मिल जाती है परंतु पब्लिकेशन से सेटिंग करके मनमाना प्रिंटेड लिखवा कर गरीब परिवार अभिभावक से वसूलते हैं इस पर संबंधित सरकारी विभाग को ध्यान देने की जरूरत है परंतु ऐसा होता नहीं है प्राइवेट स्कूल कॉलेज गरीब अभिभावक को लूटने रहते हैं और सरकार मुक दर्शन बनकर सब दिखती रहती है?
