सुनील सुरेन,महुदा धनबाद से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहना चाह रहे है कि झारखण्ड राज्य अलग करो आंदोलन में जितने भी महापुरुषो ने आम भूमिका निभाई है उन्हें सम्मान नहीं मिला है जिसे वे हक़दार है.प्राथमिक स्कूल से लेकर उच्य स्कूल को झारखण्ड राज्य आंदोलनकर्ता के महापुरुषो कि जीवनी कि इतिहास के रूप में पाठ्यकर्म में शामिल नहीं किये है केवल एक दो महापुरुष कि ही जीवनी शामिल कि गई है.सरकार से कहना चाह रहे है कि जिन महापुरुषो कि जीवनी पाठ्यकर्म में शामिल नहीं हुई है उसे अब शामिल करे ताकि उसे अधिकार मिल सके।
