आगामी 24 अप्रैल को देश भर में पंचायती राज्य दिवस मनाया जायेगा,चूँकि इसी दिन सन 1993 में सत्ता विकेन्द्रकरण के उद्देश्य से 73वां संविधान संशोधन कर पुरे देश भर में त्रिस्तरीय पंचायती राज्य व्यवस्था को लागु किया गया था। झारखण्ड में 32 वर्षों के बाद ,वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव हुआ।राज्य में हुए पंचायत चुनाव के 7 साल पुरे हो गएँ है. इन 7 सालों में हमने क्या खोया क्या पाया इसकी समीक्षा अपने आप में करने की जरुरत है।त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के साथ-साथ हमे भी कई अधिकार मिले हैं।इन अधिकारों में से एक मुख्य अधिकार हमे यह मिला कि हम अपने गांव,पंचायत के विकास के लिए एक ऐसे व्यक्ति का चुनाव करें जो वास्तव में गांव का विकास के बारे में सोचे। तो श्रोताओं, हम आपसे जानना चाहते हैं कि पंचायती राज्य व्यवस्था के तहत जो अधिकार आम जनताओं को मिला क्या उस अधिकार का उपयोग वे सही ढंग से कर पा रहे हैं ? और क्या ग्राम सभा में गांव के विकास के लिए आपके द्वारा दिए गएँ प्रस्तावों को स्वीकार किया जाता है ? आपके द्वारा चुने गएँ मुखिया,उप मुखिया समेत अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की गांव के विकास में क्या भूमिका होती है और वे अपने अधिकारों का उपयोग किस तरह से कर हैं ? साथ ही इन 7 सालों में आपके पंचायत में आपने किस तरह के बदलाव देखा और आपने अपने अधिकारों का प्रयोग किस तरह से किया ? इस पर आप अपना अनुभव और पंचायत में आये कुछ सकारात्मक बदलाव की कहानी हमारे साथ जरूर साझा करें । आपके द्वारा रिकॉर्ड कराये गए कुछ बेहतरीन प्रतिक्रियाओं को पंचायतनामा के अगले अंक में प्रकाशित किया जायेगा।