हमरा देश एक कृषि प्रधान देश है और देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है।ऐसे में अगर हम बात करें अपनी राज्य झारखण्ड की तो यहां के लगभग 80 % लोग आज भी कृषि पर निर्भर हैं। दोस्तों, हर व्यक्ति की तरह किसान भाइयों का भी सपना होता हैं कि उनके खेतों में उपज बढे और अधिक फसल प्राप्त करे ताकि वे अपने और अपने परिवार का भरण पोषण सही ढंग से कर सके।किसान अपनी इसी चाह को पूरा करने के लिए वर्तमान समय में खेतों में रासायनिक खाद का प्रोयोग करने लगे हैं।साथ ही फसलों में कीटनाशक द्वावाओं का उपयोग भी बढ़ गया है। दोस्तों, रासायनिक खाद एवं कीटनाशक द्वावाओं के उपयोग से फसल तो अच्छी होती है परन्तु खेतो की उर्वरा शक्ति धीरे -धीरे ख़त्म होती जाती है।दोस्तों,हम आपसे जानना चाहते हैं कि आखिर क्या वजह है कि बदलते समय के साथ -साथ वर्तमान में परमपरागत खाद की जगह रासायनिक खाद का प्रयोग अधिक बढ़ गया है ? क्या कीटनाशक दवा और रासायनिक खाद का बढ़ते प्रयोग खेतों को नुकसान पहुँचता है? अगर हां तो किस तरह से ? साथ ही क्या राज्य के किसानों को सही मात्रा में कीटनाशक दवा एवं रासायनिक खाद के प्रयोग करने की जानकारी दी जाती है ? आपके अनुसार खेतो की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक साधन क्या हो सकते है ? क्या किसान भाइयों को जैविक खाद प्रयोग करने के बारे में पर्याप्त जानकारी होती है ? श्रोताओं,क्या आपके क्षेत्र में जैविक खाद की उपलब्धता पाई जाती होती है ? अगरउपलब्ध रहती है तो क्या किसानों को जैविक खाद आसानी से मिल पाता है ? राज्य में जैविक खाद का प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किस तरह की पहल करनी चाहिए ?साथ ही इसमें किसान भाइयों की क्या भूमिका होनी चाहिए?
