विकास के नाम पर मनुष्यों ने अपने सुख -सुविधाओं के लिए विभिन्न प्रकार के साधनों का आविष्कार किया है। बिना इसका परवाह किये कि मानव जीवन पर उसका क्या दुष्परिणाम हो सकता है।इन्ही ऐशोआराम का एक नमूना है बढ़ती गाड़ियों की संख्या। जितने तेजी से आज सड़क पर गाडिओं की संख्या बढ़ी है,उतनी ही तेजी से सड़क दुर्घटनाएँ और सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्यां में भी इज़ाफ़ा हुआ है।आखिर इस तरह के निरंतर हो रहे सड़क -हादसों के पीछे मुख्य वजह क्या हो सकती है..? क्या वजह है की यातायात के कठोर नियम होने के बाद भी सड़क हादसे कम नहीं हो रही है..? लगातार हो रहे सड़क हादसों में कमी आये इसके लिए प्रशासन क्या कोई ठोस कदम उठा रही है...? क्या वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालन ईमानदारी पूर्वक किया जाता है...? लगातार बढ़ रही सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार को क्या-क्या कदम उठाने की जरुरत है...? और यातायात नियमों का पालन ना करने वाले चालकों पर क्या करवाई होनी चाहिए...? साथ ही इस तरह की घटनाएँ ना घटे इसके प्रति आम जन कितने गंभीर हैं और अपने स्तर पर क्या करते हैं..?