झारखण्ड राज्य का ज्यादातर हिस्सा छोटानागपुर पठार का है। पुराने ज़माने से ही यह प्रदेश आदिवासी जनजातियों का गृहक्षेत्र रहा है।और सीएनटी-एसपीटी एक्ट आदिवासी-मूलवासी का सुरक्षा कवच है. यह अधिकार अंग्रेजों के जमाने में लड़ कर प्राप्त किया गया था।परन्तु,आज भूमि विवाद झरखण्ड की ज्वलन्त समस्या बनी हुई है।मुकदमो से कोर्ट ठसे पड़े है।राजस्व न्यायलय हो या ब्यवहार न्यायलय। हर जगह भूमि विवाद के मामले भरे पड़े है। इस CNT,SPT एक्ट को लेकर आज हर ओर बवाल मचाया जा रहा है।क्या सरकार नही चाहती की विवाद कम हो? क्या सरकार का भूमि विवाद खत्म करने में नकारात्मक रवैया रहा है। क्या सरकार किसान समर्थक का खाल ओड्ड कर किसानों को भूमिहीन करने की साजिश कर रही है?आपके अनुसार CNT / SPT एक्ट में संशोधन से क्या राज्य की जनता को कोई लाभ होगा ?