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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को अगर जमीन का अधिकार मिलता है तो उनका परिवार और ज़्यादा सुरक्षित होगा तथा परिवार मज़बूत भी बनेगा। महिलाओं के नाम जमीन नहीं रहता है तो उनका महत्व नहीं रहता है। अगर महिला के नाम जमीन होगा तो वो सुरक्षित और मज़बूत बनेगी।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्त गंज प्रखंड के गुमड़ी से 32 वर्षीय विजय लक्ष्मी शर्मा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्त गंज प्रखंड से 31 वर्षीय प्रिया देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए। क्योंकि महिलाएँ खेती का काम भी करती है
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उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के हरैया सतगढ़वा प्रखंड से हमारी श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उनके दूकान के लिए उन्हें सौर ऊर्जा की ज़रुरत है।
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवानी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि यदि महिला की मृत्यु हो जाती है और उनकी कोई संतान नहीं है तो पति को कुछ हिस्सा मिल सकता है ख़ास कर उनको संपत्ति माता -पिता से मिली हो या स्वयं अर्जित की गई हो
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवानी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि पत्नी की संपत्ति में मुख्य अधिकार उसके बच्चों का होता है उसके बाद पति का होता है। यदि संपत्ति महिला द्वारा स्वयं अर्जित किया जाता है तो उस पर उसका पूरा नियंत्रण होता है। जिसे वह इच्छानुसार उपयोग या दान कर सकती हैं ।
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवानी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि उन्नीस सौ सैतालीस में हिदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम पारित किया गया था। जिनमें विधवाओं को उनके पति की संयुक्त संपत्ति में समान अधिकार प्रदान किए गए और उन्हें पति की मृत्यु के बाद बिना वसीहत के पति के संपत्ति के उत्तराधिकारी में शामिल किया गया।
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवानी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि पिता ,पत्नी , भाई संपत्ति पर अपना नियंत्रण रखना चाहते हैं और अगर महिला कमाती भी हो तो वित्तीय स्वतंत्रता देने में हिचकिचाते हैं।
