सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले गरीब, कमजोर वर्ग के लोगों को जिंदगी के बजाए मौत मिल रही है. कुछ ऐसा ही सदर अस्पताल के महिला वार्ड में ऑन ड्यूटी कर्मियों की लापरवाही से पहले प्रसव के लिए आई महिला के गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। मरे बच्चे की डिलिवरी करा महिला वार्ड से जच्चा को भर्ती रखने के बजाए जबरन घर भेज दिया गया। सुबह जच्चा की भी मौत हो गई। सुबह से शाम तक महिला का शव सदर अस्पताल में पड़ा रहा। संवेदनहीनता की हद यह है कि दो जानें लेने के लिए जिम्मेवार स्टाफों को चिन्हित कर कार्रवाई करने के बजाए अस्पताल प्रशासन दोषियों को बचाने और मरीज को संस्थागत प्रसव के लिए लेकर आई आशा कार्यकर्ता को बलि का बकरा बनाने में जुटे नजर आए।
