जिला हजारीबाग,प्रखंड बड़कागाँव से रुपेश राज जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि इनके गाँव में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति बहुत ही दयनीय है। जिस वजह से इनके गाँव के बच्चे शिक्षा के लिए लालायित हो रहे है।इनके गाँव के सरकारी स्कूलों के बच्चों का कहना है, कि इनके स्कूल में तीन शिक्षिका और तीन शिक्षक है और इनके विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। दो शिक्षक दफ्तर के कामो में लीन रहते है, जिस कारण शिक्षकों की कमी हो जाती है और बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे है। रुपेश जी का कहना है कि इस मामले पर पंचायत समिति भी कोई ध्यान नहीं देती है, जिस कारण इन लोगो को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।

जिला हजारीबाग प्रखंड इचाक से तेजनारायण प्रसाद कुशवाहा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते कि वर्तमान समय में न इचाक प्रखंड बल्कि पुरे झारखंड में देखा जाय तो स्कूलों में बच्चो को प्राथमिक शिक्षा मिल सके इसके लिए व्यवस्था की गई है।लेकिन गौर करने वाली बात है कि आज उन्हीं के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते जो गरीब और असहाय होते हैं एवं वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते हैं। राज्य में प्राथमिक शिक्षा का स्तर गिरने के पीछे एक कारण है असमानता जहां एक ओर गरीब अपने बच्चों को चाहें जैसी भी पढ़ाई हो सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाने को बेबस होते हैं वहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी अपने बच्चो को सरकारी स्कूल में न पढ़ाकर निजी विद्यालयों में पढ़ाते हैं।वे कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में कमी है जिसके कारण बच्चो को सही से शिक्षा नहीं मिल रही है।कहते हैं कि प्राथमिक शिक्षा की स्थिति में तभी सुधार हो पायेगा जब राष्ट्रपति के बच्चे से लेकर एक रिक्शा चालक के बच्चे तक सभी सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें। और इसके इसके लिए झारखण्ड सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा ऐसी नीति बनानी चाहिए, ना की शिक्षा में दोहरी नीति अपनायी जानी चाहिए

शिक्षा किसी भी इंसान के व्यक्तित्व का पहचान कराती है, लोगों में संस्कार पैदा करती है अर्थात यूँ कहे कि शिक्षा के बिना हम मानव का जीवन ही अंधकार में डूबा सा प्रतीत होता है। जिस तरह एक घर के लिए नींव का मजबूत होना जरुरी होता है ठीक उसी तरह हमारे लिए प्राथमिक शिक्षा का मजबूत होना भी बेहद जरुरी है।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए संविधान के 86वें संशोधन द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 को देश भर में लागु किया गया।दोस्तों ,हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपके पंचायत में प्राथमिक शिक्षा की क्या स्थिति है ? क्या आपके पंचायत में बच्चों को शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राथमिक शिक्षा का लाभ मिल रहा है ? और अगर नहीं मिल रहा है , तो आखिर प्राथमिक शिक्षा के इस हालात के लिए कौन ज़िम्मेवार है ? पंचायतों में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार क्या कोई प्रयास कर रही है ? साथ ही प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा,अनौपचारिक शिक्षा तथा साक्षरता आदि सम्बंधी कार्यों को देखना पंचायत प्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी है ,तो क्या पंचायत प्रतिनिधि अपने इस कार्य को ईमानदारीपूर्वक निभा रहे हैं ? आपके अनुसार पंचायतों में प्राथमिक शिक्षा की स्तर में सुधार लाने हेतु सरकार को किस तरह के कदम उठाने की जरुरत है ?