कार्मेल स्कूल हजारीबाग में के.जी. पेरेंट्स नाइट का भव्य आयोजन नन्हे बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने मोहा मन, अभिभावक हुए भावविभोर ऐसे मंच बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं: मुख्य अतिथि ऐसे कार्यक्रम बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, सामाजिक व्यवहार और आत्मबल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं: प्रधानाचार्या हजारीबाग। कार्मेल विद्यालय प्रांगण में शनिवार को के.जी. पेरेंट्स नाइट का भव्य एवं उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मंच पर अपनी मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों का दिल जीत लिया। पूरा विद्यालय परिसर तालियों और मुस्कान से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आकाश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), हजारीबाग द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात बच्चों ने नृत्य, समूह गीत, कविता पाठ और लघु नाटिकाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। बच्चों का आत्मविश्वास, मंच अनुशासन और उत्साह देखकर अभिभावक भावविभोर हो उठे और लगातार तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य अतिथि आकाश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि प्रारंभिक शिक्षा बच्चों के जीवन की सबसे मजबूत नींव होती है। कार्मेल विद्यालय जिस समर्पण और स्नेह के साथ छोटे बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रहा है, वह सराहनीय है। ऐसे मंच बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्य सिस्टर सविता मेरी ए.सी. ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि के.जी. स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों की अभिव्यक्ति क्षमता, सामाजिक व्यवहार और आत्मबल को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों की आज की प्रस्तुति उनके उज्ज्वल भविष्य की झलक है। इस सफल आयोजन में शिक्षकों की मेहनत और अभिभावकों के सहयोग की अहम भूमिका रही है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों की रंग-बिरंगी वेशभूषा, आत्मविश्वास से भरी प्रस्तुति और मासूम भाव-भंगिमाओं ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्कूल के शिक्षक, शिक्षिकाओं एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने अहम किरदार अदा किया।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि विेधवाओं को अक्सर लांछित जीवन जीने और सामाजिक रूप से बहिष्कृत किए जाने का डर होता है। दृष्टि आई एस की एक रिपोर्ट बताती है कि विधवाओं को गरिमा पूूर्ण जीवन जीने से रोका जाता है और ससुराल वाले क्रूर व्यवहार करते हैं। जमीन के मालिकाना हक़ के अभाव में विधवाएं पूरी तरह आर्थिक रूप से कमजोर हो जाती हैं।एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार जमीन ना होने पर उन्हें कम मजदूरी वाले काम करने पड़ते हैं। ऐसे में बच्चों की शिक्षा एवं देखभाल मुश्किल हो जाती है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला भूमि अधिकार पर अपनी राय साझा किया।राजकुमार मेहता ने बताया कि भारतीय समाज में लोगों की धारणा है कि जमीन और संपत्ति पर पुरुषों का अधिकार है और महिलाएं पुरुषों पर निर्भर हैं।पति की मृत्यु के बाद परिवार के पुरुष सदस्य जैसे में देवर ससुर विधवा को संपत्ति से बेदखल करने की कोशिश करते हैं। आईडीआर की एक रिपोर्ट के अनुसार विधवाओं की भूमि अधिकारों को लेकर हमेशा सवाल उठाया जाता रहा है और उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता है।हालांकि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम जैसे कानून महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देते हैं।लेकिन जमीनी स्तर पर इनका ठीक से पालन नहीं होता है। कानूनी ढांचे और महिलाओं के अधिकारों के वास्तविक प्रयोग के बीच एक बड़ा अंतर है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने महिला भूमि अधिकार पर अपनी राय साझा किया।राजकुमार मेहता ने बताया कि भारत में विधवा महिलाओं के साथ भूमि विवाद बढ़ते जा रहे हैं।इसकी वजह पितृ सतात्मक सामाजिक और मान्यताएं पैतृक समपत्ति में हिस्सेदारी के कानूनी अधिकार और व्यवहारिक कियान्वयन के बीच का अंतर है। इसमें सामाजिक,संंस्कृतिक पूर्वाग्रह महिलाओं को अपनी जमीन से वंचित करते हैं। जिससे उन्हें आर्थिक असुरक्षा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।खासकर जब पति की मृत्यु के बाद कानूनी प्रक्रियाएं जटिल होती है और भूमि के मालिकाना हक को चुनौती दी जाती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों और महिलाओं को बेटो के बराबर संपत्ति में अधिकार मिलते हैं। अगर माँ का देहांत बिना वसियत के होती है तो बेटी माँ के पैतृक और स्वयं द्वारा अर्जित सम्पत्ति में हिस्सेदार होती है।
Transcript Unavailable.
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झारखण्ड राज्य से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अगस्त दो हजार बीस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया की बेटियों का पैतृक संपत्ति में अधिकार पूर्वव्यापी है।यह दो हजार पांच के संशोधन के पहले भी लागू होगा और पिता के जीवित होने या न होने से फर्क नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने कहा की जहाँ कानून में स्पषता नहीं है वहाँ न्याय समता और सदिवेक के विधानसों का पालन किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सके ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि समानता का अधिकार में बताया गया की कोर्ट ने माना की बेटियों को सम्पत्ति से वंचित करना समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और यह लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देता है ,जिससे महिलाओं को समस्या उत्पन होती है। दो हजार पांच का संशोधन- इसमें बताया गया कि इस संशोधन ने बेटियों को सहदायिक का दर्जा दिया लेकिन कुछ अस्पस्टताओं के कारण सुप्रीम कोर्ट को बार बार स्पष्टीकरण देना पड़ा जिससे यह सुनिश्चित हो सके की बेटियों को भी बेटों के समान अधिकार मिले।
