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विष्णुगढ़ प्रखंड के मडमो निलकंठवा टोला निवासी धनी महतो के 36 वर्ष से पुत्र खेमलाल महतो का मौत कर्नाटक क्षेत्र में हो गया है इसकी सूचना मिलते हैं परिजन रो-रो कर बुरा हाल हो गया है प्रवासी श्रमिक के हित में काम करने वाले सिकंदर अली ने सरकार से मदद की गुहार लगाये है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से कूप अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में लगभग अस्सी प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं।लेकिन भूमि पर मालिकाना हक़ न होने और पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना के कारण उन्हें किसान के रूप में मान्यता नही मिलती है।जमीन आम तौर पर पिता,भाई या पति के नाम होती है।खुद के नाम जमीन ना होने के कारण महिलाएं कर्ज,कृषि ऋण,माफ़ी,सरकारी योजनाएं,इत्यादि जैसे अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सम्पत्ति का हस्तांतरण आमतौर पर केवल बेटों को होता है। बेटियाँ और पत्नी अपने भाई या पति के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने के लिए जमीन पर अपना दावा छोड़ देती हैं।साथ ही महिला किसानों के पास उनके नाम पर जमीन के दस्तावेज नहीं होते हैं,जो सरकारी सहायता और बैंक ऋण के लिए अनिवार्य है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसानों के पास उनके नाम पर जमीन के दस्तावेज नहीं होते हैं। सरकारी सहायता और बैंक ऋण के लिए खुद के नाम जमीन होना अनिवार्य है।महिलाओं को कोई कार्य करने के लिए या कृषि लोन नहीं मिल पाता है। महिलाएं खेती में बुआई, रोपाई, कटाई,इत्यादि करती है। मगर इसे खेती ना मान कर अतिरिक्त कार्य माना जाता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अधिकांश सरकारी नीतियाँ किसान को जमीन के मालिक के रूप में परिभाषा करती है। जिससे खेतिहर,महिला मजदूर या भूमिहीन महिला किसान बहाल हो जाए। भूमि में क़ानूनी अधिकार प्राप्त होने के बावजूद महिलाओं को इस बात की जानकारी या जागरूकता नही रहती है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के नाम भूमि न होने के कारण बैंक से कर्ज नही मिलता है।साथ ही वे किसान क्रेडिट कार्ड, सोलर पंप या फसल मुआवजा जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाती हैं

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