झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से महेंद्र राणा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में महिलाओं के भूमि अधिकार विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों और प्रथागत व्यवस्थाओं के माध्यम से सुनिश्चित कि जाते हैं। हिंदू कानून अपने वर्तमान स्वरूप में महिलाओं को भूमि का स्वामित रखने और उसके मामलों का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने का अधिकार देता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में सामाजिक विकास के विमर्श में महिलाओं के भूमि अधिकार हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कृषि गरीबी उन्मूलन लिंग आधारित हिस्सा में कमी महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के संदर्भ में डब्ल्यू ए एल आर के महत्व पर चर्चा की गयी अब व्यापक अकादमी साहित्य और सामाहिक कार्यवाई के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के भूमि अधिकार लैंगिक समानता को अधिक प्राप्त करने के महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं थैंक्यू

विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में रामनवमी ईद सरहुल त्यौहार शांति सौहार्द वातावरण में मनाने को लेकर अंचल अधिकारी नित्यानंद दास की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई बैठक में बड़ी संख्या में विभिन्न पंचायत के जनप्रतिनिधि मौजूद थे रामनवमी त्योहार आपसी प्रेम भाईचारे के साथ बनाने का बात रखगया।

भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने जिले के विभिन्न मंडल अध्यक्षों का चयन किया जिसका सूची जारी होने के बाद विष्णुगढ़ प्रखंड पूर्वी मंडल अध्यक्ष के लिए जोबर पंचायत अंतर्गत उच्चाघना निवासी गोविंद कुमार महतो का नाम आने के बाद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है गोविंद महतो ने कहा कि भाजपा पार्टी में शुरुआती दौर से निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक काम कर रहा हूं इसी का फल मुझे प्राप्त हुआ बधाई देने वालों में चंद्रनाथ भाई पटेल मधुसूदन प्रसाद तुलसी सिंह रजनी सूरज पाठक अशोक गुप्ता सुशील मंडल पप्पू मंडल नागेश्वर महतो गौतम भारतीय दीपू भाई रविंद्र कुमार वर्णवाल धीरज शर्मा जीवन सोनी तुलो महतो सुरेंद्र गंझू समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर बधाई दे रहे हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से लोकेश रंजन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कृषि विकास और ग़रीबी उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण साधन हो सकती है लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है जिसका एक कारण है यह की महिलाएं जो अक्सर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्पूर्ण साधन हो सकती है।लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अर्जुन मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान के समक्ष कई चुनौतियाँ होती हैं।जैसे - घर के काम,बच्चों की देखभाल और पानी ईधन,जुटाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है। जानकारी और शिक्षा की कमी भी एक वजह है। साक्षरता की निम्न दर और पुरुष प्रधान कृषि विस्तार सेवाओं के कारण उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी कम मिल पाती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि स्वामित्व का अभाव में अधिकांश महिलाओं के पास उनके नाम पर जमीन नहीं होती है। जिसे वे लोन या सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऋण और संसाधनों तक सीमित पहुंच -इसमें बैंक लोन ,खाद उन्नत्ति बीज और यंत्रीकरण तक उनकी पहुंच पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। अवैध तकनीक श्रम और असमान वेतन -वे खेतों में सबसे कठिन काम जैसे की रोपाई,निराई ,कटाई ,जुताई करती हैं। लेकिन उन्हें अक्सर किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है और समान काम के लिए पुरुषों से कम वेतन भी मिलता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में महिला किसान को भूमि स्वामित्व के अभाव में लोन और उन्नत कृषि तकनीकों तक सिमित पहुँच समान मजदूरी न मिलने और पारिवारिक घरेलू जिमेदारियों की बोझ जैसी प्रमुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वे अक्सर अकुशल श्रम और मौसमी बेरोजगारी से भी जूझती हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसानों को योजनाओं की जानकारी नही होती है।उनको पता ही नहीं होता है कि उनके लिए कोई योजना भी है,जिससे उन्हें फायदा मिल सकता है।महिलाओं के लिए 'महिला सशक्तिकरण योजना' बनाई गई. जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन यह कैसा सशक्तिकरण है?जब महिला के पास उसके नाम से जमीन ही नही है?

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।