भाजपा झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देशानुसार हजारीबाग जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने जिले के विभिन्न मंडल अध्यक्षों का चयन किया जिसका सूची जारी होने के बाद विष्णुगढ़ प्रखंड पूर्वी मंडल अध्यक्ष के लिए जोबर पंचायत अंतर्गत उच्चाघना निवासी गोविंद कुमार महतो का नाम आने के बाद कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है गोविंद महतो ने कहा कि भाजपा पार्टी में शुरुआती दौर से निष्ठा एवं ईमानदारी पूर्वक काम कर रहा हूं इसी का फल मुझे प्राप्त हुआ बधाई देने वालों में चंद्रनाथ भाई पटेल मधुसूदन प्रसाद तुलसी सिंह रजनी सूरज पाठक अशोक गुप्ता सुशील मंडल पप्पू मंडल नागेश्वर महतो गौतम भारतीय दीपू भाई रविंद्र कुमार वर्णवाल धीरज शर्मा जीवन सोनी तुलो महतो सुरेंद्र गंझू समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर बधाई दे रहे हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से लोकेश रंजन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कृषि विकास और ग़रीबी उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण साधन हो सकती है लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है जिसका एक कारण है यह की महिलाएं जो अक्सर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्पूर्ण साधन हो सकती है।लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अर्जुन मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान के समक्ष कई चुनौतियाँ होती हैं।जैसे - घर के काम,बच्चों की देखभाल और पानी ईधन,जुटाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है। जानकारी और शिक्षा की कमी भी एक वजह है। साक्षरता की निम्न दर और पुरुष प्रधान कृषि विस्तार सेवाओं के कारण उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी कम मिल पाती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि स्वामित्व का अभाव में अधिकांश महिलाओं के पास उनके नाम पर जमीन नहीं होती है। जिसे वे लोन या सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऋण और संसाधनों तक सीमित पहुंच -इसमें बैंक लोन ,खाद उन्नत्ति बीज और यंत्रीकरण तक उनकी पहुंच पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। अवैध तकनीक श्रम और असमान वेतन -वे खेतों में सबसे कठिन काम जैसे की रोपाई,निराई ,कटाई ,जुताई करती हैं। लेकिन उन्हें अक्सर किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है और समान काम के लिए पुरुषों से कम वेतन भी मिलता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में महिला किसान को भूमि स्वामित्व के अभाव में लोन और उन्नत कृषि तकनीकों तक सिमित पहुँच समान मजदूरी न मिलने और पारिवारिक घरेलू जिमेदारियों की बोझ जैसी प्रमुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वे अक्सर अकुशल श्रम और मौसमी बेरोजगारी से भी जूझती हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसानों को योजनाओं की जानकारी नही होती है।उनको पता ही नहीं होता है कि उनके लिए कोई योजना भी है,जिससे उन्हें फायदा मिल सकता है।महिलाओं के लिए 'महिला सशक्तिकरण योजना' बनाई गई. जिसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन यह कैसा सशक्तिकरण है?जब महिला के पास उसके नाम से जमीन ही नही है?

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लोग लोग रजिस्ट्री के पैसे बचाने के लिए महिलाओं के नाम जमीन दर्ज करवाते हैं।जिस भी जमीन को यदि हम महिला के नाम पर लेंगे या खरीदेंगे,तो उसमें पैसों की बचत होती है।जिनके पास ज्यादा सम्पत्ति है और उन्हें सरकार को अपनी सम्पत्ति का लेखा - जोखा पेश करना होता है,तो उस समय वो सरकार से अपनी अर्जित सम्पत्ति छिपाने के लिए या पैसा बचाने के लिए,जमीन महिला के नाम कर देते हैं।अगर पति पिता या ससुर नहीं है तब मजबूरी में जमीन महिला के नाम की जाती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से सोमर मुंडा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब महिलाओं को भूमि पर अधिकार और पहुँच प्राप्त होती है,तो इसका आर्थिक लाभ उनके परिवार और समुदाय तक पहुँचाता है।शोध से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपनी कृषि और भूमि आधारित आय का अधिक हिस्सा अपने परिवार के लिए योगदान करती है।जिसके परिणाम स्वरूप खाद्य सुरक्षा,बच्चों के स्वास्थ और शिक्षा में सुधर होता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से श्यामदास ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के भूमि स्वामित्व से आर्थिक,सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त होती है।कुछ समुदायों में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त समुदायिक भूमि तक ही पहुँच प्राप्त होती है,जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है।इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ यह है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर महिला भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है।