झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जिला बांदा,बल्लान और नागावा गाँव में लगभग दस किसान महिलाओं से बात की गई जिनमें से सिर्फ तीन ही ऐसी महिलाएं थी जिनके नाम पर खेती की जमीन थी और वो भी सिर्फ इसी वजह से थी क्योंकि उनके पिता या पति नहीं थे।गांव की 53 वर्षीय आमना कहती है कि उनके पास पांच बीघा जमीन है। जिसमें से ढाई बीघा जमीन उनके पति के मारने के बाद उनके नाम हो गई।बाकी की ढाई बीघा जमीन उनके सास के नाम पर है।वह रोपाई,बुआई,खेत आवंटन आदि सारे काम करती हैं। जब उनसे सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है।पैदावार अच्छा नही होने के कारण आजीविका चलाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।