झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पंद्रह अक्टूबर महिला किसान दिवस के मौके पर खबर लहरिया टीम ने खबर दिया था कि जब महिला किसान से उसकी लागत के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि साऐ दस हजार खेती में लग जाते है खेती करने के लिए उन्हें अपने गहनों को भी गिरवी रखना पड़ता है। कई बार उन्हें कर्ज भी लेना पड़ता है।क्योंकि उनके पास खेती के लिए जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं होते हैं।जब फसल अच्छी नहीं होती तो उन पर कर्ज और भी दोगुना हो जाता है। कर्ज लेकर खेती में पैसा लगा देते हैं। ऐसे में फसल खराब हो जाता है तो वह कर्ज दोगुना हो जाता है।छोटे किसानों को फसल से बहुत मुश्किल से जीविका चलती है।ऐसे में उनकी आय बिलकुल नही होती है।ऊपर से कर्ज का भार आय दिन बढ़ता रहता है।
