झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान में महिला समाज को भूमि सम्पत्ति सम्बंधी अधिकार से वंचित रखना वास्तव में उस आधी आबादी अथवा आधी दुनिया की अवमानना है, जो एक मां, बहन और पत्नी अथवा महिला के किसान के रूप में दो गज जमीन और मुट्ठी भर संपत्ति की वाजिब हकदार है।भारत में महिलाओं के भूमि तथा संपत्ति पर अधिकार केवल वैधानिक अवमानना के उलझे सवाल पर नहीं है। बल्कि उसका मूल उस सामाजिक जड़ता में है जिसे आज आधुनिक भारत में नैतिकता के आधार पर चुनौती दिया जाना चाहिए।