झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि विकास में महिलाओं के सामने आने वाली प्रमुख बधाओं में से एक भूमि के स्वामित्व और नियंत्र का अधिकार न होना है अपने मूलभूत दायित्व के बावजूद महिलाएं शायद ही कभी अपनी बनाए हुई जमीन की मालिक या नियंत्रक बन पाती हैं। रिपोर्टो के अनुसार भारत में समान्य भूमिधारकों में से तेरह प्रतिशत से भी भी कम महिलाएं हैं। स्वामित्व की यह कमी उनके निर्णय लेने, सरकारी भूखणंडों तक पहुच प्राप्त करने और राष्ट्रीय प्रथाओं में सुधार के लिए संसाधनों का आवंटन करने की क्षमता को सिमित करती है
