झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ समुदाय में महिलाओं को केवल अपने पतियों या पुरुष रिश्तेदारों से प्राप्त सामुदायिक भूमि तक ही पहुंच प्राप्त होती है। जो अक्सर उनकी वैवाहिक स्थिति से जुड़ी होती है। इससे महिला का भूमि स्वामित्व असुरक्षित हो जाता है।जिसका अर्थ है कि पति की मृत्यु या तलाक होने पर वह भूमि पर अपना अधिकार खो सकती है। जिससे वह और उसके बच्चे गरीबी में धकेल दिए जा सकते हैं। कृषि श्रम बल में महिलाओं की अच्छी खासी हिस्सेदारी है लेकिन कृषि भूमि मालिकों को उनकी संख्या अल्पसंख्यक है। यहाँ तक की जब उन्हें भूमि का अधिकार प्राप्त होता है तब भी उनके भूखंड अक्सर दूसरों के भूखंडों की तुलना में छोटे और कम गुणवत्ता वाले होते हैं