बिहार राज्य के मधुबनी जिले से रामाशीष सिंह मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते है कि मधुबनी जिले के खजौली मुख्यालय के डाकघर को न अपनी जमीन है और न ही अपना भवन है।यह डाकघर दशकों से भाड़े के मकान पर चल रहा है जिसमें सलाना छह हजार रूपये भाड़ा देना पड़ता है।जबकि खजौली बाजार में कई एकड़ सरकारी जमीन है जो ऐसे ही पड़ी हुई है और इसके अधिक्रमित अधिकारी इसका लाभ उठा रहे है।इसलिए इनका कहना है कि महाराज्यपाल पटना को अपनी जमीन और अपनी भवन के लिए उचित कार्यवाही करनी चाहिए।

राज्य बिहार के जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि खजौली प्रखंड के विभिन्न पंचायतो में इन दिनों आंगनबाड़ी केंद्र भवन बनाने के लिए जमीन की विकट समस्या खड़ी हो गयी है।प्रखंड के प्राय सभी पंचायतो में जमीन उन्मूलन के सम्बन्ध में हल्का कचहरी वाली सरकारी जमीन है।जिसे अतिक्रमित कर लोग लाभ ले रहे है।जमीन पर अतिक्रमण हटा कर आंगनबाड़ी केंद्र बनाया जा सकता है। अंचल अधिकारी के कार्यालय में इससे सम्बंधित अभिलेख भी है।

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

बिहार राज्य के मधुबनी जिले से,रामाशीष जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि खजौली अंचल में वर्षों से नहीं हो रहा है दाखिल ख़ारिज जिसे हज़ारों लोग परेशान हैं।जिसके कारण भूस्वामियों को अनेक सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है।इसके साथ ही सरकार को भी कई लाख रुपये का राजस्व नहीं मिल रहा है।बिहार भूमि दाखिल खारिज नियामवली 2012 के अनुसार दाखिल खारिज के लिए याचिका दायर करने के लिए अंचल निरीक्षक को प्रतिवेदन दे सकते हैं।जिसके दो दिनों के भीतर कर्मचारीयों को इसकी जाँच करनी होती है।लेकिन इस जांच की परक्रिया दो दिनों के बदले महीनों और वर्षों में भी पूरी नहीं होती हैं।लोग थक कर बैठ जाते हैं पर कोई सामाधान नहीं निकलता है।इस समस्या के निराकरण के लिए जल्द ही कोई प्रयास किया जाना चाहिए।

बिहार राज्य के मधुबनी जिले से,रामाशीष जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि मधुबनी के खजौली अंचल में हज़ारों व्यक्तियों की जमाबंदी कई सालों से अधतन अपडेट नहीं की जा रही है।यहाँ के राजस्व एवं अंचलाधिकारी की भ्रस्टाचार की नीति की वजह से यहाँ के लोग अपने दादा-परदादा के नामों को ढ़ोने के लिए विवश हैं।जिसकी वजह से लोगों को कई सरकारी योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है।किसी भी मृतक विक्रेता के नाम पर जमाबंदी नहीं चलाई जा सकती पर खजौली प्रखंड में खूब चल रही हैं।मालगुजारी के नाम में भी मृतक का नाम भी अंकित है।इस समस्या पर कई बार स्थानीय अधिकारी का ध्यान आकर्षित किया गया है पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी है।

जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अखड़ा गौड़ा दक्षिण पंचायत के पंचायत सरकार भवन के गलत स्थान चयन का विरोध में एकदिवसीय धरना दिया गया। वार्ड नंबर 1 से 7 के जनप्रतिनिधि ,पूर्व जन प्रतिनिधि व जनता खजौली प्रखंड कार्यालय के सामने अपनी मांगो को लेकर एक दिवसीय धरना दिए। मांगो में प्रमुख है अखड़ा गौड़ा दक्षिण पंचायत के पंचायत सरकार भवन का निरिक्षण जिला पदाधिकारी करे।साथ ही प्रस्तावित पंचायत सरकारी भवन का भूखंड का निरिक्षण करे. भौगोलिक दृष्टिकोण से स्थान का चयन सही नहीं है

जिला मधुबनी से रामानंद सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है की वर्ष 2015 में भूकंप आया था जिसमे मधुबनी जिले के दो स्टेडियम क्षतिग्रस्त हो चुके है।इसमें अब खेल -तामाशे नहीं होते है।इन दोनों स्टेडियमों का निर्माण वर्ष 1987 में हुआ था।जिसका निर्माण तत्कालीन डीएम अशोक कुमार सिंह ने करवाया था।उतर बिहार के इस सबसे बड़े ऑउटडोर स्टेडियम में एक साथ 25 हजार खेल दर्शको की बैठने की व्यवस्था थी।पर स्टेडियम की हालत देख कर यहाँ के खेलप्रेमी उदास दिख रहे है।वर्तमान समय में ऑउटडोर स्टेडियम खंडहर बन चूका है।मवेशियों का यहाँ चरागाह बन चुका है।यहाँ पर मवेशी बांधे जा रहे है। कुछ लोगो ने इस पर कब्ज़ा ज़माने की नियत से कोर्ट में एक मामला दायर कर रखा है जिससे जमीन उनके कब्ज़े में रहे।प्रशासन भी उदासीन नजर आ रहा है।

राजकिशोर यादव,जिला मधुबनी के मधवापुर प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि मधवापुर प्रखंड के छोटा किसान मजदुर धान की खेती की क्षति देखकर घबरा जाते है क्योकि बड़े किसान से लीज के रूप में लेकर धान की फसल किये थे.और जिस किसान से खेत लेकर फसल किया था उसे भरपाई कहाँ से किया जायेगा।बिहार सरकार फसल क्षति के लिए क्षतिपूर्ति का लाभ दे रही है लेकिन खेतों का रसीद बड़े किसान के पास है।इसलिए क्षति का लाभ भी उन्हीं लोगों का होगा।और यही वजह है की छोटा किसान न घर का रहता है और न ही घाट का रहता है।जिसके पास जमीन होती है वह खुद खेती नहीं करते है जिसकारण उनको कोई हानि नहीं होगा क्योकि उन्हें हर तरफ से आमदनी ही होती है।

जिला मधुबनी प्रखंड मधवापुर के साहरघाट से रामनरेश ठाकुर जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि मधवापुर प्रखंड के राजस्व कर्मचारी मालगुजारी रशीद काटने में मनमानी तरीके से पैसे ले रहे है।इस सम्बन्ध में साहरघाट के कई किसानों ने शिकायतें की है।सरकार की तरफ से सौ रुपये प्रति एकड़ की दर से पैसे लेने है पर इसके विपरीत राजस्व कर्मचारियों द्वारा डेढ़ से दो सौ रुपये लिया जा रहा है