जिले में पड़ी रही प्रचंड गर्मी से ताल तलैया सूख गये हैं।अब खेतों सहित पशु व पक्षियों की प्यास बुझानेवाली धनौती नदी में पानी सूखने से इसका अस्तित्व भी खतरे में है। विगत कई वर्षों के बाद धनौती नदी ड्राई दिख रही है। इसके सूखने से लाखों की मछलियां गायब हो गयी हैं। इससे नदी की बंदोबस्ती करानेवाले मछुआरों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बेतिया से पूर्वी चम्पारण जिले के आधा दर्जन से अधिक प्रखंडों से होकर गुजरनेवाली धनौती का पानी पताल चले जाने से इसके वजूद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जिले में 60 किलोमीटर से अधिक लंबी धनौती नदी गुजरती है। इसके जल का उपयोग किसान खेेती किसानी के लिए करते थे। कपड़ा धोने के लिए इसके पानी का उपयोग किया जाता था। लेकिन इसबार प्रचंड गर्मी पड़ने से धनौती नदी का पानी गायब है। नदी में मौजूद कोलगाटा व सीप भी गायबधनौती नदी में बड़े पैमाने पर जलीय फल कोलगाटा की उपज होती थी। लोग कोलगाटा का स्वाद चखते थे। लेकिन पानी सूखने से कहीं भी कोलगाटा दिखाई नहीं पड़ रहा है। धनौती नदी से सीप को पकड़कर इसका इस्तेमाल बटन निर्माण के लिए किया जाता था। लेकिन नदी सूखने से सीप का कहीं भी अता पता नहीं है। नदी में सिल्टेशन से भी कम हो चुकी है नदी की गहराईनदी में गाद भर चुका है। इससे इसकी गहराई भी कम हो गयी है। नदी की गहराई कम होने से इसके जलस्तर पर असर पड़ा है। बरसात के दिनों में यह नदी लबालब भरकर उछलती रहती है। लेकिन विगत दो माह से धनौती नदी का पानी कम होते होते आज की तारीख में सूख चुकी है। गाद निकालने की दिशा में प्रशासनिक स्तर से कवायद नहीं किये जाने से इसके अस्तित्व की समस्या अब गहराने लगी है। इसके अलावा धनौती नदी के अतिक्रमण से इसका किनारा सिमटते जा रहा है। जिससे बरसात के समय पानी बहते हुए जल्द निकल जाता है।