एक शिक्षक की जिम्मेदारी है । यह पहला आनंद है । कर इससे आगे नहीं बढ़ सकते हैं और अंत तक उन्हें कम नहीं किया जा सकता है क्योंकि हर बच्चा अलग होता है और हर किसी की क्षमता अलग होती है । केवल योग्य शिक्षा कक्ष में प्रवेश करने तक ही रहें , फिर इसे स्वाभाविक मानव क्षमता पर छोड़ दें कि वे क्या करते हैं , हाँ , एक अच्छे दरवाजे पार करने वाले आयोजक की तरह , प्रकाश पर रहें , अगर वे इसे देखते हैं , तो वे आगे बढ़ते रहेंगे । यदि आप असफल भी हो जाते हैं , तो भी आकर आंकड़ों में प्रकाश न देखें , फिर उसी प्रकाश में जो आपकी दृढ़ता , निष्ठा , निवास और अनुशासन से संदेह पैदा होता है , शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं है , न ही इसे मानव व्यवहार से बनाया जा सकता है । कोई भी व्यवसाय ऐसा व्यवसाय नहीं बन सकता है जिसने ऐसा प्रयास किया हो , जहां शिक्षा विफल हो गई हो और बंद दरवाजे के शीर्षक धारक पाए गए हों , ताकि मनुष्य को मानव बने रहने और समझ को जागृत करने की क्षमता दी जा सके । अपने आस - पास के लोगों की क्षमता को बनाए रखना , प्रकृति का संरक्षण करना , संस्कृति को परिपक्वता देना , प्रगति और धन के लिए , अनुसंधान में रुचि जगाना , बचपन को अपने दिमाग में जीवित रखना , फूलों और पक्षियों के रंगों को जीवित रखना । दंगों में जीवन की खुशी को महसूस करना ही एक शिक्षक को करना होता है । यह तभी संभव है जब ऐसे साधु को अपने भीतर जीवित रखा जाए जब उसे स्वयं वह सब करना हो जो जीवन जीने के लिए करना है ।

स्कूल का क्या महत्व है , यह बच्चों में क्या बदलाव लाता है । जब कोई बच्चा स्कूल की तरह अपना पहला कदम उठाता है , तो उसे पता नहीं होता कि वह वहाँ है । जीवन में सबसे अच्छे और महत्वपूर्ण स्थान पर जाकर , किसी भी बच्चे के व्यक्तित्व को आकार देने और उसके भविष्य को प्रबंधित करने में स्कूल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है । विद्यालय एक ऐसा स्थान है जहाँ बच्चों का सामाजिक विकास तेजी से होता है । समाजीकरण के संदर्भ में , घर को सबसे बड़ा स्कूल माना जाता है जहाँ एक बच्चा प्राथमिक स्तर पर सब कुछ सीखना शुरू कर देता है , लेकिन उसके बाद स्कूल एक ऐसा मंच बन जाता है । आइए हम स्कूल की भूमिका को समझें , स्कूल की कई परिभाषाएँ हो सकती हैं , वास्तव में , स्कूल एक ऐसी जगह है जहाँ सीखने की क्षमता तेजी से बढ़ती है , बच्चे बाहरी दुनिया को जानते हैं । इस स्थिति में , वह कुछ नया सीखता है और घर आता है और कहता है कि स्कूलों में कई प्रकार की गतिविधियाँ होती हैं जहाँ वह बोलना , स्कूल में व्यवहार करना , स्कूल आने पर माता - पिता के साथ व्यवहार करना सीखता है । यह संगीत और चित्रकला जैसी चीजों को विकसित करने में मदद करता है । प्रत्येक विद्यालय के अपने मानक होते हैं । बच्चे अपने मानकों के अनुसार कम या ज्यादा सीखते हैं । हम अक्सर अच्छे स्कूलों की तलाश शुरू कर देते हैं । शिक्षा के चार स्तर हैं । माता - पिता के रूप में उनमें से प्रत्येक जिन उद्देश्यों को महत्वपूर्ण मानते हैं , वे हैं आर्थिक विकास ताकि वे एक प्रासंगिक पेशे में उद्देश्यपूर्ण काम पा सकें और एक बदलते वातावरण में शिक्षा की प्रमुख आवश्यकताओं में से एक के रूप में जीवन यापन कर सकें ।

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सांस्कृतिक परीक्षा दो हजार सात अगस्त को शुरू हुई , जो बच्चों का समग्र स्वास्थ्य है । आधुनिक शिक्षा प्रणाली कौशल प्रदान करने और बौद्धिक ज्ञान के विकास पर अधिक केंद्रित थी , लेकिन सर्वांगीण विकास की उपेक्षा की । संस्कृति परिचय के संस्थापक ने कहा कि उन्होंने धर्म और समर्पण की भावना पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है , जबकि ये चीजें न केवल आध्यात्मिक हैं , बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से भी मजबूत बनाती हैं । स्वर संगीत और भारतीय वाद्य संगीत में स्वर्ण पदक विजेता स्नातक सुभाष चुडीवानी ने कहा , " मैंने छह अलग - अलग बच्चों को हमारे शास्त्रों से श्लोकों , गीतों और मंत्रों की शक्ति के बारे में सिखाया है । उन्हें यह समझाया जाना चाहिए कि इसका उद्देश्य केवल पूजा है । संस्कृत परीक्षा दो हजार सात अगस्त को शुरू हुई , जो बच्चों के समग्र स्वास्थ्य पर जोर देने की इच्छा रखती है । मनुष्य की शिक्षा प्रणाली व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने और बौद्धिक ज्ञान के विकास पर आधारित है । यह अधिक केंद्रित है लेकिन सर्वांगीण विकास की अनदेखी करता है ; यह बच्चों को धार्मिक प्रथाओं और क्लासिक कहानियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सामाजिक विरासत देता है , और जातियों को पीछे हटने के दिनों और मूल्य - आधारित कहानियों के माध्यम से देता है । खस्कर अपने शुरुआती वर्षों में स्पंज की तरह होते हैं और उनके सामने आने वाली हर जानकारी को अवशोषित करते हैं , वे सीखने के लिए समर्पित होते हैं और अपने शिक्षकों में विश्वास करते हैं और सीखने में विश्वास करते हैं और फिर इसे अपने जीवन में दोहराते हैं ।

उत्तरप्रदेश राज्य के आजमगढ़ जिला से अनुष्का मौर्या ने मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रस्तुत किया कविता। "क्या खोया क्या पाया"

अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें , अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें , अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें । सास , आपके परिवार ने आप पर भरोसा किया है , उन्होंने आपको सिखाने के लिए अपना खून और पसीना बहाया है , कड़ी मेहनत करके और आपको कुछ लिखकर अपनी मेहनत बर्बाद न करें । उनके विश्वास के साथ खिलवाड़ न करें , बल्कि वही करें जिसका आपने सपना देखा था क्योंकि आपके परिवार ने आप पर भरोसा किया था । आप पर गर्व महसूस करें लोग कहते हैं , उनकी बात न सुनें , इस बारे में सोचें कि आपके परिवार ने आपको योग्य बनाने के लिए क्या किया । इसलिए बस उनकी कड़ी मेहनत को याद रखें और अपने सपनों को पूरा करें जो उनके सपने भी हैं और दिखाएं कि कड़ी मेहनत से छोटे या बड़े अमीर नहीं होते हैं और गरीब कड़ी मेहनत से सच्चा समर्पण और कड़ी मेहनत होती है ।

उत्तरप्रदेश राज्य के आजमगढ़ जिला से अनुष्का मौर्या ने मोबाइल वाणी के माध्यम से प्रस्तुत किया कविता। "खूबसूरती"

दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।

नमस्कार आदाब श्रोताओं मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है, रोजगार समाचार यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो उत्तर प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा निकाली गई फार्मासिस्ट आयुर्वेद के 1002 पदों पर कार्य करने के लिए इच्छुक हैं। वैसे उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने फार्मेसी में डिप्लोमा किया हो। इसके साथ ही आवेदनकर्ता की न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष होनी चाहिए। इन पदों के लिए आवेदन शुल्क सभी उम्मीदवारों के लिए 25 रुपए रखा गया है।अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://www.freejobalert.com/upsssc-pharmacist-ayurveda-2024/1075332/ ।याद रखिए इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 03-03-2024 है। तो साथियों,अगर आपको यह जानकारी लाभदायक लगी, तो मोबाइल वाणी ऐप पर लाइक का बटन दबाये साथ ही फ़ोन पर सुनने वाले श्रोता 5 दबाकर इसे पसंद कर सकते है। नंबर 5 दबाकर यह जानकारी आप अपने दोस्तों के साथ भी बाँट सकते हैं।