सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से अरुणदेव से बातचीत की। अरुणदेव का कहना है सरकार सबसे पहले सभी को उस लायक बनाए। सभी को रोजगार दे। इससे सभी लोग आगे बढ़े इससे बहन को उनका अधिकार देने के लिए कोई एतराज नहीं करेगा। जब वे उस लायक रहेंगे ही नहीं तो बहन को संपत्ति कैसे देंगे। बहन की शादी चार लाख पांच लाख देकर कर देते हैं। उनकी बहने भी जहां उन्हें दिया जाता है वहां अपना जीवन काट रही हैं।यदि कोर्ट का आदेश है तो जो बड़े बड़े नेता लोग हैं वे अपनी बहनों को संपत्ति दें तभी गरीब लोगों को इसका सलाह दें। अगर दिल से भाई बहन का रिश्ता है तो धन से मतलब नहीं होता। उनके बीच कोई दरार नहीं आएगा
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ श्री जिव दास साहू आलू की खेती के लिए खाद और सिचाई से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला आलोक श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जकीउललाह से साक्षात्कार लिया।जकीउललाह ने बताया कि ये मोबाइल वाणी पर प्रसारित कार्यक्रम सुनते हैं।बेटियों और महिलाओं को सम्पत्ति अधिकार के प्रति मोबाइल वाणी के कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक करना चाहिए।बेटियों को जमीन में हिस्सा जरूर मिलना चाहिए
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"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा मसूर फसल की बुवाई से सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें .
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
पिछले छह महीने से चल रहे कार्यक्रम 'अपनी जमीन अपनी आवाज़ ' को काफी हद तक श्रोताओं ने सराहा है और सभी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। कई श्रोताओं ने इस कार्यक्रम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दिया । कार्यक्रम के माध्यम से समाज में कई परिवर्तन आ रहा है। एक महिला को पति के देहांत के बाद ससुराल से निकाल दिया गया ,मायके से सहयोग तो मिला पर भाई की तरफ से सहयोग नहीं मिला। पिता को पैतृक संपत्ति में बेटी का अधिकार की जानकारी नहीं थी ,पर कार्यक्रम के ज़रिये पिता को समझाया गया जिसके बाद उन्हें जमीन में हिस्सा मिला ,जिसके माध्यम से वो सशक्त और आत्मनिर्भर बनी। वहीं एक महिला उर्मिला देवी का कहना है कि इनके घर में अपनी जमीन अपनी आवाज़ कार्यक्रम सुना जाता है और इस कार्यक्रम से प्रभावित हो कर विचार में बदलाव आया और यह निर्णय लिया कि वो अपनी बेटी को दहेज़ न देकर जमीन का हिस्सा देंगी। दोस्तों , भले ही कार्यक्रम समाप्त हो रहा है लेकिन समाज में बदलाव की बयार धीरे धीरे ही सही बहने लगी है।
पिछले छह महीने से चल रहे कार्यक्रम 'अपनी जमीन अपनी आवाज़ ' को काफी हद तक श्रोताओं ने सराहा है और सभी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। कई श्रोताओं ने इस कार्यक्रम को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दिया । कार्यक्रम के माध्यम से समाज में कई परिवर्तन आ रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से एक महिला के जीवन में बहुत सारे बदलाव आये है। उन्हें ये समझ आया की अपनी बहु और बेटियों को भी अच्छा जीवन देना चाहिए। जैसा परिस्तिथि उन्होंने झेला वो उनके बच्चो पर नहीं आना चाहिए। जब उन्हें हिस्सा मिला तो, ये हिस्सा उन्हें अपनी बहु और बेटियों को भी देना चाहिए। बलरामपुर जिला से एक पति ने इस कार्यक्रम से प्रेरित हो अपनी पत्नी को 18x100 का प्लॉट अपने पत्नी के नाम कर दिया। दोस्तों , भले ही कार्यक्रम समाप्त हो रहा है लेकिन समाज में बदलाव की बयार धीरे धीरे ही सही बहने लगी है।
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला आलोक श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से शान्ति देवी से साक्षात्कार लिया।शान्ति देवी ने बताया कि ये मोबाइल वाणी पर प्रसारित कार्यक्रम सुनती हैं और इनको बहुत अच्छा लगता है। इनके पिता ने इनको सम्पत्ति में हिस्सा दिया था और ये अपने बेटी को भी देंगी। ये निर्णय इन्होने बहुत पहले से किया हुआ है। बेटा और बेटी में जमीन -आसमान का अंतर होता है। जैसे बेटी मायके और ससुराल दोनों जगह देखती है,बेटा वैसे नही देख पाता है। बेटा और बेटी में यह अंतर हमेशा रहेगा
