उत्तरप्रदेश राज्य के संत अबीर नगर से के सी चौधरी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सरकार का दावा है कि हर कोई पानी की टंकी से पानी पी रहा है, लेकिन वास्तविकता अलग प्रतीत होती है। एक ग्रामीण अपने गाँव में पानी की टंकी के दौरान हमसे मिला है, पानी की टंकी की क्या स्थिति है, पानी की आपूर्ति हो सकती है या नहीं, आज हम उससे बात करेंगे कि पानी की टंकी लगी है, आप क्या खाना चाहते हैं, पानी की टंकी लगभग एक साल से लगी हुई है।
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से के.सी. चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हों, लेकिन अगर देखा जाए तो आज भी महिलाएं उतनी आत्मनिर्भर नहीं हो पा रही हैं। उन्हें हिंसा और भेदभाव से मुक्त रहने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए। महिलाओं को वास्तव में महिला के रूप में देखा जाता है तो वे हिंसा की शिकार हो जाती हैं। महिलाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य तक मुफ्त पहुंच का भी अधिकार है, चाहे वे हिंसा, दहेज उत्पीड़न या पारिवारिक स्थिति की शिकार हों। ताकि महिलाएं अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें और महिलाओं को शिक्षा में भी मुफ्त प्रावधान किया जाए ताकि महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें।
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संतकबीरनगरः बेलहर ब्लाॅक के ग्राम पंचायत बरडाड के राजस्व गांव पिपरी में रोज की तरह खेत में चरने गई भैंस गिरी पडी थीं। चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग पहुंचे तो तीन भैसों की मौके पर मौत हो चुकी थी और अन्य छह की हालत गंभीर है। मौके पर पहुंचे प्रधान कमलेश यादव ने पशु चिकित्सक को फोन किया। मौके पहुंची डाॅक्टरों की टीम ने बीमार भैसों के इलाज में जुट गई। पशु पालक हरीराम ने बताया कि वह लोग रोज की तरह भैंस चराने ले गए थे। भैसें खेत में चरने लगीं। वह लोग कुछ दूरी पर खड़े थे। कुछ समय के बाद जब भैंस आगे नहीं निकलीं तो मौके पर जाकर देखा तो तीन भैंस बेसुध पड़ी थीं ।इस संबंध में पूछे जाने पर पशु चिकित्सक डॉक्टर र ने बताया कि भैंसों का पोस्टमार्टम होगा, तभी मौत का कारण स्पष्ट होगा। हल्का लेखपाल आशीष वर्मा ने कहा कि मामले की रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
मोबाइल वाणी संत कबीर नगर से के.सी. चौधरी बता रहे है की आने वाले समय में पानी जीवन और पानी का आधार बनेगा। कोई भी पानी को महत्व नहीं दे रहा है, लेकिन अगर धीरे-धीरे देखा जाए तो पानी जीवन की कहानी बन जाएगा क्योंकि भूमि की सतह से पानी का स्तर धीरे-धीरे नीचे जा रहा है और जिसके कारण नल बन रहा है। हैंडपंप सूख गए हैं और इस समय अधिकांश गाँवों में हैंडपंप से पानी नहीं निकल रहा है।
हम मनरेगा पर कुछ चर्चा करना चाहेंगे, आप मनरेगा के बारे में क्या जानते हैं। या महिलाओं को मनरेगा से क्या लाभ मिल सकता है या उन्हें मनरेगा से कैसे लाभ मिलेगा, ये सारी जानकारी थोटा लिंकू जी देंगे। मनरेगा को विशेष रूप से महिलाओं के काम करने और सरकार से कुछ धन प्राप्त करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज कल ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। सब कुछ उल्टा हो गया है। मनरेगा अब केवल नाम में है। इससे कोई लाभ नहीं है। अर्थात पुष्कम आदि इस समय मनरेगा में उपलब्ध नहीं हैं, इस समय मनरेगा में उपलब्ध नहीं हैं। कोई काम नहीं मिल रहा है, पैसा वगैरह, कभी खाते होते में आता है, कभी कावर आता में पैसा तो पूरा पैसा और कोई का मतलब है कि आधा नशे में है, आधा अधूरा है।
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे एक श्रोता रिंकू देवी से बात किया उन्होंने बताया की एक महिला तभी सशक्त हो सकती है जब वह शिक्षित हो या सशक्त हो जब वह समाज में अपने मन की बात कह सके। जब वह अपने दम पर नौकरी या व्यवसाय या कृषि करती है।महिलाओं के लिए कई अधिकार हैं, इन अधिकारों पर ध्यान देने से वे पूरी तरह से सशक्त हो सकते हैं और बदलाव ला सकते हैं
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उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर जिला से राम प्रकाश सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएँ हमेशा आधार कार्ड, पिन कार्ड, नौकरी की सुरक्षा जैसी सरकारी योजनाओं के चक्र में आगे रहने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन आज के समाज में पीछे रह गई हैं। पता नहीं उन्हें समाज में इतना पीछे क्यों रखा जाता है, जबकि महिलाओं को आगे रखना महत्वपूर्ण है, संपत्ति के अधिकार का भी समर्थन नहीं किया जाता है। संपत्ति का अधिकार भी होना चाहिए, जबकि सरकार भी कई योजनाएं देती है।
