उम्मीदवारों का फैसला चौथे दिन किया जाएगा। पूरे लोकसभा में बासठ संत कबीर नगर में नौ हजार एक सौ छियालिस वोट पड़े हैं। उम्मीदवारों ने अपने वोट और अपनी जमा राशि का रास्ता देखा। यदि ऐसा है, तो लगभग एक लाख 81 हजार उम्मीदवारों की आवश्यकता है ताकि वे अपनी जमानत राशि बचा सकें। जमानत राज्य जमा करना अनिवार्य हो गया था और जिसे उम्मीदवारों ने जमा किया था और इस समय चुनाव की गिनती की जाएगी। अस्सी हजार वोटों की जरूरत होगी तो उनकी सुरक्षा बच जाएगी। जानकारी के लिए यहां संत कबीर नगर की लोकसभा सीट पर ग्यारह उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा के प्रवीण कुमार निशा सपा गठबंधन के साथ हैं। बीएसपी से लक्ष्मीकांत पपुरीसद, सरदार पटेल सिद्धार्थ पार्टी से मोहम्मद नलीमाशरफ, कुलदिप प्रगतिशील समाज पार्टी के धीरज श्रीवास्तव, सर्वजन आवाज पार्टी के राजेंद्र यादव और भारतीय एकता पार्टी के सुभाष चंद्र दुबे बहुजन निर्दलीय मित्र सेन सत्य वंत प्रकाश और रामकृष्ण दुबे द्विवेदी, मुक्त मोर्चा के आनंद कुमार दौतम, उन लोगों में शामिल हैं जिनके भाग्य का फैसला 4 जून को होगा, लेकिन जमानत याचिका के लिए।
भीषण गर्मी के कारण दस्त और बुखार से पीड़ित हैं। चिलचिलाती गर्मी और चिलचिलाती धूप ने आम जनता को बेचैन कर दिया है, जबकि दस्त और बुखार से पीड़ित मरीज और बच्चे पी. आई. यू. में अस्पताल पहुंच रहे हैं। दो बच्चों का इलाज डॉक्टर और क्लीनिक में एक बिस्तर पर दो बिस्तरों पर किया जा रहा है, इस समय देखा जा रहा है कि बच्चों में गंभीर गर्मी और गर्मी के दौरे के साथ अधिक लोग आ रहे हैं। दस्त का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल के बच्चों की ओ. पी. डी. में हर दिन सौ से अधिक बच्चे दस्त बुखार से पीड़ित हैं, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि दस्त और बुखार इस समय दस्त का मुख्य कारण है। इसका कारण यह है कि कठोर धूप डॉ. सुनील कुमार बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि इस समय बच्चों के स्वास्थ्य का बहुत सावधानी से ध्यान रखा जाना चाहिए। और सुनिश्चित करें कि बहुत सारा पानी पियें ताकि बच्चे बीमार न पड़ें।
मायके के अपने सुनहरे दिन हैं या आप बच्चों की छुट्टियां कह सकते हैं। पैंसठ प्रतिशत महिलाएँ मायाके के लिए निकलती हैं और उन्हें जाना पड़ता है क्योंकि वे खुद को बच्चों के अध्ययन में पाती हैं। सभी रिश्तेदारों से वंचित, कहीं जाने में असमर्थ और शायद जाना भी नहीं चाहते, हमारे बच्चे का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। दो छुट्टियाँ होती हैं, सर्दी और गर्मी, इसलिए लोग मैके के लिए निकलते हैं और लगभग सभी के घर में अपनी बेटियाँ और बहनें होती हैं। वह चलती रहती है, समय की कमी के कारण वह बार-बार नहीं जा पाती है। वह केवल विशेष परिस्थितियों में जाती है, इसलिए इस समय मां का बोझ बच्चों पर है।
हमारा देश लड़कियों पर निर्भर है। हमारी माँ भी कोई है। की लड़की राही होगी हमारी बहन भी कैसी के जहां बहू है कैसी की लड़की राही होगी लड़कियाँ से ही आज हमें है और आज से नहीं आग से चली रही है। अगर ऐसी स्थिति में भी भ्रूण हत्या जारी रही तो आने वाले समय में सभी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में आपसे सबसे खास अपील है कि इस पर प्रतिबंध लगा दें, ऐसा न करें, सरकार भी काफी है, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ। टीबी में हर जगह बैनर पोस्टर का प्रचार मोबाइल में आता रहता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर लगाए से अलोक श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पानी जीवन है, यह सच है, पानी के बिना हम अधूरे हैं। अगर पानी नहीं है, तो हमारे लिए सब कुछ बेकार है। अगर भोजन नहीं है, कपड़े नहीं हैं, तो एक व्यक्ति जीवित रह सकता है, लेकिन पानी के बिना, वह जीवित नहीं रह सकता है। इसलिए, हमें जितना संभव हो उतना पानी बचाना चाहिए और अधिक पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए। इसे व्यस्त नहीं होना चाहिए क्योंकि गर्मी के कारण पानी का स्रोत बहुत कम हो गया है। इस समय पानी नहीं है। यह सूख चुका है। कुछ जिलों में पानी के लिए दहशत है जहां ताल पोखारा गड्ढा बहुत कम है। आप सभी को पानी बढ़ाने और खुद पानी बचाने के लिए पेड़ लगाने के लिए कहना चाहते हैं।
पहाड़ हमारे देश को कई सुरक्षा प्रदान करता है हमारे देश में अन्य देशों के बीच जो पहाड़ खड़े हैं, वे सुरक्षा कवच के रूप में खड़े हैं। जब यह आगे बढ़ता है तो पहाड़ों से टकराता है और टकराने के बाद आसमान में बादल की तरह बारिश होती है और जब बारिश होती है तो जीवन चलता रहता है। अगाथा ठीक हो जाता है लेकिन इस समय पहाड़ तेजी से टूट रहे हैं और पहाड़ों के पत्थरों से कई तरह के काम किए जा रहे हैं। हमारे देश में पहाड़ों को वैसे ही तोड़ा जा रहा है जैसे पेड़ों को काटा जा रहा है, जैसे इस समय पहले पहाड़ से पर्याप्त नहीं है। हालांकि यह तर्कसंगत नहीं है, लेकिन निकट भविष्य में हमारे लिए समस्याएं होंगी
पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए बहुमूल्य रत्न हैं। पेड़ दवाई की तरह है, उनमें से एक यह है कि हमारा जीवन पेड़ पर निर्भर करता है, पेड़ हमें ऑक्सीजन देता है, पर्यावरण साफ है। पर्यावरण को साफ रखें, इसे साफ करें और कहीं न कहीं पेड़ भी हमारे लिए उपयोगी हैं क्योंकि वे हमें ऑक्सीजन देते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड को ही अवशोषित करता है। यह इनाम के लिए भी फायदेमंद है। हम एक-दूसरे के पूरक हैं, लेकिन दिन-प्रतिदिन हमारी संख्या बढ़ रही है और पेड़ों की संख्या कम हो रही है, यही कारण है। वह प्रकृति शुष्क हो गई है। समय पर बारिश नहीं हो रही है। गर्मी बहुत तेजी से गिर रही है। वर्षा के अभाव में कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं। बीमारियाँ फैल रही हैं, हर तरह का नुकसान हो रहा है, जो हमारे लिए विशेष रूप से हानिकारक है। जीवन जीने के लिए अच्छे तरीके से स्वस्थ रहना है, इसलिए इस समय जितना हो सके उतने पेड़ लगाएं और जो भी पेड़ आपके पास हों।
उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से के.सी. चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की महिलाओं की स्तिथि में सुधार हो रहा है।समाज में देखा जाए तो शिक्षा का प्रभाव महिलाओं और लड़कियों पर भी पड़ रहा है। सरकार इसके लिए कदम उठा रही है।
जहाँ आम जनता गर्मी के कारण परेशान है, वहाँ डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को छाया में रहना चाहिए और धूप से बचना चाहिए, लेकिन जो लोग आवश्यक काम करते हैं उनका कहना है कि अगर घर अगर आप बाहर नहीं आते हैं तो आजीविका पर भी संकट आ सकता है। अगर देखा जाए तो गर्मी और गर्मी के कारण अक्सर देखा जाता है कि कुछ जगहों पर दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। यह देखना बहुत दिलचस्प है कि इतनी धूप और गर्मी इतनी तीव्र क्यों है, जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की कटाई अंधाधुंध है। लोग धूप को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और धूप और गर्मी का प्रकोप जारी है। देखो, गाँव में एक बगीचा भी नहीं है। पहले के समय में, बगीचे हुआ करते थे जहाँ लोग दोपहर का भोजन करते थे। बगीचे सुबह से शाम तक बगीचों में बिताते थे, लेकिन आज वे निर्जन हो रहे हैं और पेड़ों को अंधाधुंध काटा जा रहा है। हालाँकि सरकार का कहना है कि वृक्षारोपण किया जा रहा है, लेकिन वृक्षारोपण केवल नाममात्र के हैं। यह चल रहा है और अगर इसे लगाया जा रहा है, तो भी इसकी ठीक से देखभाल नहीं की जा रही है, जिसके कारण गर्मी की लहर चल रही है।
उत्तप्रदेश राज्य के संत कबीर नगर से के सी चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि महिलाओं को उसके नाम से नहीं पुकारा जाता है
