भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.

अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

किसी भी समाज को बदलने का सबसे आसान तरीका है कि राजनीति को बदला जाए, मानव भारत जैसे देश में जहां आज भी महिलाओं को घर और परिवार संभालने की प्रमुख इकाई के तौर पर देखा जाता है, वहां यह सवाल कम से कम एक सदी आगे का है। हक और अधिकारों की लड़ाई समय, देश, काल और परिस्थितियों से इतर होती है? ऐसे में इस एक सवाल के सहारे इस पर वोट मांगना बड़ा और साहसिक लेकिन जरूरी सवाल है, क्योंकि देश की आबादी में आधा हिस्सा महिलाओं का है। इस मसले पर बहनबॉक्स की तान्याराणा ने कई महिलाओँ से बात की जिसमें से एक महिला ने तान्या को बताया कि कामकाजी माँओं के रूप में, उन्हें खाली जगह की भी ज़रूरत महसूस होती है पर अब उन्हें वह समय नहीं मिलता है. महिलाओं को उनके काम का हिस्सा देने और उन्हें उनकी पहचान देने के मसले पर आप क्या सोचते हैं? इस विषय पर राय रिकॉर्ड करें

खलारी। सम्यक ज्ञान निकेतन की बैठक गुरूवार को मनोज भुईंयां की अध्यक्षता में हुई। बैठक में वर्ष 2024-25 लिए संस्था के लोगों द्वारा कई योजना बनाई गई। साथ ही बैठक में केन्द्रीय कमिटी की घोषणा करते हुए कमिटी के पदाधिकारियों का मनोनयन किया गया। जिसमें संरक्षक नीरज भोगता, अध्यक्ष मनोज भुईंया, उपाध्याक्ष अनिता गंझू, सचिव गणेश भुईंयां, सहसचिव शंभूनाथ गंझू, कोषाध्यक्ष संगीता देवी के अलावा विजय गंझू, मनीश राम, संध्या कुमारी, रेश्मी कुमारी को षामिल किया गया है। वहीं सम्यक ज्ञान निकेतन खलारी प्रखण्ड अध्यक्ष के पद पर रमेश गंझू एवं कार्यालाय प्रभारी रवीन्द्रनाथ चौधरी को बनाया गया है। बैठक में मनोज भुईंयां, अनिता गंझू, गणेश भुईंयां, शंभूनाथ गंझू, रवीन्द्रनाथ चौधरी सहित अन्य उपस्थित थे।

आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे अपने श्रोताओं की राय

हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार बीस तीन सालों में दुनिया के पांच बड़े व्यापारियों की संपत्ति में दोगुने से ज्यादा का इजाफा हुआ है, जिस समय इन अमीरों की दौलत में इजाफा हो रहा था, ठीक उसी समय पांच मिलियन लोग गरीब से और ज्यादा गरीब हो रहे थे। इससे ज्यादा मजे की बात यह है कि हाल ही में दावोस में हुई वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की बैठक में शीर्ष पांच उद्योगपतियों ने एक नई रणनीति पर चर्चा और गठबंधन किया।

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