उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से आशा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्होने मोबाइल वाणी में सुना कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए जिसके बाद इन्हे विचार आया कि इनके नाम से भी एक जमीन होनी चाहिए। आशा की शादी को दो वर्ष हुए थे। इनके पति निजी स्कूल में शिक्षक थे। ये अपनी परिवार के साथ किसी तरह गुज़र बसर कर रही थी। मोबाइल वाणी का कार्यक्रम सुनने के बाद इन्हे अहसास हुआ कि अगर जमीन रहे तो उसे स्थायी पूंजी के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। ये विचार आशा ने अपने पति के साथ साझा किया लेकिन इनके पति ने कहा कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वो आशा के नाम एक जमीन ले सके। और कहा कि वो इस बारे में एक बार अपने पिता से बात करे क्योंकि पिता के जमीन में बेटी का हिस्सा होता है । आशा ने सोचा कि इससे भाई बहन में दरार आ सकती है इसलिए उन्होंने इसकी बात अपने पिता से नहीं की। कुछ दिन बाद इनके पति की बीमारी के कारण काम छूट गया। घर खर्च चलना मुश्किल हो गया। जिसके बाद आशा ने अपने पिता से जमीन के विषय बात की और उनके पिता ने कहा कि हिस्सा तो बेटा को मिलता है। लेकिन आशा की पूरी परेशानी सुन कर उनके पिता ने आशा के भाई से बात की। भाई पहले बातों को नहीं समझ रहा था लेकिन बाद में अपनी बहन की समस्या को समझने के बाद भाई बहन की मदद के लिए आगे आया। इसके बाद आशा के पिता ने अपनी जमीन में से कुछ जमीन आशा के नाम कर दिया। आशा उस जमीन में खेती कर रही है। पति जब बीमारी से ठीक हुए तो अब वो भी खेती में आशा के साथ काम कर रहे है। अब उनकी समस्या दूर हो गयी है। इसके लिए वो मोबाइल वाणी को धन्यवाद देती है
