उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अगर महिला हर जिम्मेदारी उठा सकती है, तो भूमि का अधिकार क्यों नहीं जब तक ये सवाल हम सब खुद से नहीं पूछेंगे तब तक बदलाव मुश्किल है। अगर जिम्मेदारियों की बात की जाए तो हमेशा महिलाओं का नाम पहले आता है। वो घर की जिम्मेदारी से ले के बच्चों की जिम्मेदारी उनका भविष्य उनकी पढ़ाई घर में हर एक व्यक्ति का खाना और केवल खाना नहीं उनके पसंद का खाना हर टाइम बनाती है। मतलब महिलाओं के काम का कोई अंत नहीं है और वो अपनी हर जिम्मेदारी पूरी निषष्ठा से निभाती है और कभी भी किसी को शिकायत का मौका नहीं मिलता। तो फिर जब उन्हें आपकी तरफ से उन्हें कुछ देने की बात आती है तो आपको ऐसा क्यों लगता है की मेरा कुछ छीन जाएगा या मेरा सम्मान कम हो जाएगा। बल्कि आपको गर्व होना चाहिए कि आप महिला को आगे बढ़ा रहे हैं और आपके इस व्यवहार से समाज में भी बदलाव देखने को मिले। जब तक कोई एक व्यक्ति साहस करके आगे नहीं बढ़ेगा तब तक और लोगों के अंदर वो सोच नहीं आएगी उन सबको यही लगता रहेगा की ये तो एक अपमान का विषय है। या महिलाओं को अधिकार देना कमजोरी की निशानी है
