उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब हम महिलाओं के भूमि अधिकार की बात करते है, तो हम सिर्फ अपने लिए नहीं अपनी बेटियों के लिए भी बात कर रहे होते हैं। अगर हम आज चुप रहे तो कल भी वही कहानी दोहराई जाएगी। हर महिला का यह कर्तव्य है की जो उसके साथ हुआ है, वो आगे उसकी बेटियों उसकी बहुँओं के साथ ना हो। अगली पीढ़ी के साथ ना हो। हमारे देश में महिलाओं के साथ बहुत से अत्याचार हुए हैं उनको बहुत से अधिकारों ऐ वंचित रखा गया है। शायद ये हमारी पीढ़ी आखिरी हो जिसके साथ इतना अन्याय हो रहा हो। इसके बाद हम अपनी पीढ़ी को बदल सकते हैं। उन्हें भी समझा सकते है की तुम्हारे भी अधिकार है। उन्हें दिखा सकते है एक एक उदाहरण के तौर पे की तुम्हारा भी हक है। अगर हम आज आवाज उठायेंगे, आज अपने हक के लिए लड़ेंगे तो आगे आने वाली पीढ़ी में लोगो लोगों की मानसिकता बदलेगी। वो बच्चे जो हमारी अगली पीढ़ी बनने वाले है। उन्हें समझ में आएगा की हमारी माताओं ने अपने हक के लिए लड़ाई लड़ी। तो उनके दिमाग में ये पहले से ही रहेगा की महिला और पुरुष दोनों बराबर है। इसलिए केवल अपने लिए ही नहीं अपने आने वाले पीढ़ी के लिए आवाज उठाना जरुरी है