उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि शादी हो जाने के बाद महिलाओं को ना अपने घर वालों की तरफ से हक दिया जाता है और ना ही अपने ससुराल वालों की तरफ से। शादी के बाद महिला को कहा जाता है की अब ये घर तुम्हारा है पर जब बात जमीन की आती है, तो उसका नाम कही नहीं होता। अगर रिश्तों में बराबरी चाहिए तो प्रॉपर्टी में भी बराबरी होनी चाहिए। शादी के बाद जिस घर में वो जाती है वहाँ पे कहा जाता है की ये घर तुम्हारा है। जबकि वहाँ पर उसके कोई भी अधिकार नहीं होते और उसका अपना घर जहाँ वो बचपन से रही है। वहाँ के लोग उसको कहते है की अब ये घर तो पराया हो गया है। तो आखिर में ना उसके पास अपने घर की संपत्ति बचती है और ना ही ससुराल की जहाँ पर वो शादी करके गयी है। दोनों ही तरफ से महिलाओं को अधिकारों से वंचित किया जाता है। उन्हें बताया जाता है की ये सब काम तुम्हारा नहीं पुरुषों का है। इसलिए रिश्तों के साथ ही प्रॉपर्टी में भी बराबरी लाने के लिए हमें सोच को बदलने की जरूरत है