उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान में महिला समाज को भूमि/संपत्ति संबंधी अधिकार से वंचित रखना वास्तव में उस आधी आबादी अथवा आधी दुनिया की अवमानना है जो एक माँ, बहन और पत्नी अथवा महिला किसान के रूप में दो गज जमीन और मुट्ठी भर संपत्ति की वाजिब हकदार है।भारत में महिलाओं के भूमि तथा संपत्ति पर अधिकार, केवल वैधानिक अवमानना के उलझे सवाल भर नहीं हैं बल्कि उसका मूल, उस सामाजिक जड़ता में है जिसे आज आधुनिक भारत में नैतिकता के आधार पर चुनौती दिया ही जाना चाहिये। भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में से है जहाँ संवैधानिक प्रतिबद्धता और वैधानिक प्रावधानों के बावजूद महिलाओं की आधी आबादी आज भी धरातल पर अपनी जड़ों की सतत तलाश में है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।