उत्तर प्रदेश राज्य से मोबाइल वाणी के माध्यम से आशीष बता रहें हैं की सरकार कोरोना से सम्बंधित डाटा को छुपा रही है प्रधानमंत्री का कहना है की ऑक्सीजन के कमी से किसी की मौत नहीं हुई है जो की ये भी आंकड़ा झूठा है। उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार का कहना है की इन्होने कोरोना के मामलो को अच्छा से संभाला है लेकिन हम सब देख रहें हैं की स्थिति क्या है गाओं में तो कोरोना नहीं है लेकिन शहर में तो अभी भी है और सरकार धीरे-धीरे अब स्कूल भी खोल रही है इसलिए हमे सावधानी बरतनी होगी मास्क पहनना होगा साबुन से हाथ धोते रहना होगा और दो गज की दुरी बनाकर रखना होगा।
नमस्कार दोस्तों, कोरोना वायरस का कहर कम होता दिख रहा है, शहर और रास्ते फिर खुलने लगे हैं, लोग अपने काम पर वापस जाने की तैयारी में है. लेकिन इन सबके पीछे एक अहम मसला है...जो छूट रहा है! ये है ग्रामीण स्वास्थ्य की बदहाल व्यवस्था.. जिस पर बात करना इसलिए जरूरी है कि क्योंकि भारत की अधिकांश आबादी अभी भी गांवों में बसती है. जिनकी सेहत वहां के बदहाल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर निर्भर है. कोरोना की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा भयावह स्थिति ग्रामीण इलाकों में बनी. साथियों, हमें बताएं कि आपके गांव के सामुदायिक, प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति कैसी है? क्या वहां दवाएं, चिकित्सक और दूसरा मेडिकल स्टॉफ है? क्या इन केन्द्रों पर पर्याप्त बिस्तर, आॅक्सीजन सिलेंडर और दूसरे जरूरी उपकरण उपलब्ध हो रहे हैं? कोरोना काल के दौरान क्या इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और दूसरी बीमारियों से ग्रसित लोगों को इलाज मिल सका? क्या कोरोनाकाल के दौरान गांव में टीकाकरण का काम प्रभावित हुआ है?अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
साथियों, कोरोना संक्रमण ने देश के हर वर्ग को बुरी तरह प्रभावित किया है. लोग दवाओं और दुआओं दोनों की आस लिए हर रोज जागते हैं और इसी उम्मीद के साथ सोते हैं कि शायद कल सब कुछ ठीक हो जाए. आम जनता को कोरोना के इलाज में किस तरह की परेशनियां आ रहीं है, ये जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।
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