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मध्य्प्रदेश से राधे श्याम जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि सरकार योजनाओं का निर्माण तो करती है,पर उन योजनाओं को लागू करने की जगह दबा दिया जाता है।सरकार अगर किसानों के लिए योजनाएं बनाती है और उसका लाभ किसानो तक पहुँचे ये उनका उद्देश्य है तो ग्रामीण अंचलों में जहाँ योजनाएँ नहीं पहुँच पाती है,उन जगहों पर सरकार के ओर से कुछ कर्मचारियों के द्वारा योजना की जानकारी विस्तृत रूप में किसानों को देनी चाहिए।कालाबजारी को रोकने और किसानों की सहायता के लिए सरकार को किसानों को फसल का भुगतान नकद ही करना चाहिए।किसानों को जब अपनी फसल का भुगतान भी समय पर नहीं मिलता या कठिन परिस्थितियों जब पैसों की जरुरत होती है,तब उनके मेहनत के पैसे भी उन तक नहीं पहुँच पाते है,तो परेशान और हताश हो कर वो आत्महत्या करने पर विवश हो जाते हैं।इन सब समस्याओं से निकलने के लिए सरकार को किसानों को योजना की जानकारी जरूर देनी चाहिए।

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भारत में कृषि वास्तविक अर्थों में जीवन रेखा रही है। 70% भारतीय किसान हैं और खेती से ही उनकी आजीविका चलती है ।कृषि देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।और यहां के किसान अन्नदाता कहे जाते हैं ,फिर भी आज ,ये किसान ही सबसे ज्यादा आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं । इसी कारण राष्ट्रीय किसान संगठन ने किसानों को कृषि उपज का भुगतान नगद राशि में करने की मांग की है।बावजूद इसके पिछले चार माह से मंडियों में कृषि उपज की खरीद के एवज में किसानों को व्यापारियों द्वारा भूगतान चेक के माध्यम से किया जा रहा है।जो किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है और किसान को व्यापारियों द्वारा दिए गए चेक को कैश कराने के लिए दर दर ठोकरें खानी पड़ रही है।साथ ही बहुत से किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला भी सामने आ रहा है।