मुसहरी प्रखंड मौसम सी एल एफ के बुक कीपर बैद्यनाथ कुमार कहते है कि जीविका मोबाइल वाणी आने से समूह की दीदियों में जागरूकता तो आई ही है इसके अलावा समाज भी जागरूक हो रहे है।

मुसहरी प्रखंड के सुस्ता पंचायत की CM पिंकी कुमारी से जाने मोबाइल वाणी के प्रयोग के तरीके साथ ही जाने कैसे रिकॉर्ड कर सकते है अपने सवालों को।

अब एनआईसी के माध्यम से जून के पूरक पोषाहार की राशि लाभार्थी के खाते में जाएगी मुज़फ़्फ़रपुर । कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभुकों को मिलने वाली जून महीने की पूरक पोषाहार की राशि अब आईसीडीएस निदेशालय स्तर से ही एनआईसी के माध्यम से सीधे लाभुकों के खाते में भेजी जाएगी। इस कार्यक्रम की शुभारंभ समाज कल्याण मंत्री ने अपने कार्यालय कक्ष में किया। राशि हस्तांरण के लिए एनआईसी के द्वारा ई-लाभार्थी पोर्टल विकसित किया गया है। जिससे कुल 832761 लाभार्थियों यथा - (06 माह से 03 वर्ष के सामान्य/कुपोषित बच्चे/06 माह से 03 वर्ष के सामान्य/अतिकुपोषित बच्चे/03 से 06 वर्ष के बच्चे एवं गर्भवती/धातृ महिलाओं) प्रति लाभार्थी निर्धारित राषि की दर से कुल 1601.78 लाख रू. की राशि हस्तांतरित की गई है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इसी व्यवस्था के तहत राशि का हस्तांतरण लाभार्थियों के खाता में किया जायेगा । मंत्री, समाज कल्याण विभाग ने कहा कि यह एक अनोखा प्रयास पोषाहार वितरण को अधिक पारदर्शी बनायेगा। दरअसल पहले यह डीबीटी की राशि सीडीपीओ स्तर से ही लाभुकों के खाते में भेजा जाता था, लेकिन अब इस नियमों में बदलाव किया है।

बच्चों के बुखार को नज़रअंदाज़ न करें, एईएस के लक्षणों से रहें सतर्क मुज़फ़्फ़रपुर : बच्चों के बुखार को अब हल्के में ना लें। आपकी जागरुकता नौनिहालों को नई जिंदगी दे सकती है। एईएस के लक्षण हों तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर से दिखाएं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सामान्य और चमकी बुखार में फर्क क्या है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार किसी भी साधारण या वायरल बुखार में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसका असर दो से चार दिन तक रहता है। इसकी शुरुआत बदन टूटने व थकान से होती है। कंपकंपी व चक्कर आना भी सामान्य बुखार के लक्षण हो सकते हैं। वहीं चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज़ बुखार चढ़ा ही रहता है। बदन में ऐंठन होती है, बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमज़ोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा, जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है। डॉक्टरों के अनुसार चमकी बुखार से ग्रस्त बच्चों में पानी और हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर की कमी देखी जा रही है। मस्तिष्क का ज्वर संक्रामक नहीं होता है, लेकिन ज्वर पैदा करने वाला वायरस संक्रामक हो सकता है। चमकी बुखार 15 साल तक के बच्चे को अपनी चपेट में ले रहा है

घर पर रह रहे बच्चों की दैनिक गतिविधि पर ट्विटर हैंडल से आईसीडीएस देगा जानकारी मुज़फ़्फ़रपुर : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों की रोकथाम देश के साथ राज्य के लिए भी चुनौतिपूर्ण साबित हो रहा है. इस महामारी में सरकारी महकमा प्रत्येक स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है. कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल एवं आंगनबाड़ी केंद्र भी लंबे समय से बंद है, जिसके कारण बच्चे स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं. इस परिस्थिति में आईसीडीएस द्वारा संचालित अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन(ईसीसीई) कार्यक्रम की उपयोगिता बढ़ जाती है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों की दैनिक गतविधियों को रचनात्मक बनाना है. इसे ध्यान में रखते हुए आईसीडीएस ने @ICDS Bihar नाम से ट्विटर हैंडल की शुरुआत की है एवं इसके माध्यम से ईसीसीई के तहत बच्चों की दैनिक गतिविधि को बेहतर करने की जानकारी दी जा रही है.

फातेहा ग्राम पंचायत मोतीपुर प्रखंड की सीएम नूतन देवी ने मोबाइल वाणी के लिए हुए प्रशिक्षण के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दिया।

कर्मठता एवं समर्पण से किया चमकी बुखार पर नियंत्रण - सप्ताह में दो दिन करती हैं सामुदायिक बैठक - इस वर्ष जागरुकता के कारण नहीं आया है एईएस का कोई केस मुजफ्फरपुर : चमकी ने अपने पांव पसारने शुरु कर दिए हैं। इस लिहाज से इस बार स्वास्थ्य विभाग के साथ जिला प्रशासन भी पूरी तन्मयता के साथ एईएस के प्रति लोगों को जागरुक कर रहा है। इन सभी जागरुकता अभियान को सफल बनाने में जो अपनी अहम भूमिका निभाती हैं वे एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी सेविका होती हैं। यह लोगों के घरों में जाकर उन्हें जागरुक करती हैं। ऐसे ही एक स्वास्थ्य की सिपाही हैं जिले के मोतीपुर प्रखंड के नरियार प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र की एएनएम नीलम देवी। नीलम विगत 12 वर्षों से इस क्षेत्र में जागरुकता अभियान को लीड कर रही हैं। इनके अनुभव और मेहनत का नतीजा ही है कि एईएस के लिए अतिसंवेदनशील होते हुए भी इनके क्षेत्र में अभी तक कोई केस नहीं आया है। उन्होंने अपने पोषण एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सघन जागरूकता अभियान चलाया है तथा आशा कर्मियों की मदद से समुदाय को इस महामारी से बचाव तथा नियंत्रण पर जागृत किया है।

मुसहरी प्रखंड के संगम सी एल एफ के एम आर पी मिथिलेश कुमार बतलाते है वे जीविका मोबाइल वाणी में कार्यक्रमों को सुनकर लोगो को जागरूक कर रहे है और समुदाय के लोग भी उनकी बातों को गंभीरता से मानने लगे है।

मुसहरी प्रखंड के मौसम सी एल एफ के एम आर पी वीरेंद्र कुमार बतलाते है कि जीविका मोबाइल वाणी पर चमकी बुखार को लेकर दी जा रही जानकारी काफी अहम है और इसे जरूर सुनते रहना चाहिए।

• निर्जलीकरण(डिहाइड्रेशन)की स्थिति साबित हो सकती है जानलेवा • शिशुओं के स्वास्थ्य पर रखें नजर अगले कुछ दिनों में जिले में मानसून के सक्रीय होने की सम्भावना मौसम विभाग ने जताई है. बारिश की फुहारों का आनंद उठाते समय अपने खान पान एवं साफ़ सफाई पर भी ध्यान देने की जरुरत है. बारिश के मौसम में डायरिया की समस्या आम हो जाती है और ससमय इसका प्रबंधन नहीं होने से यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर डायरिया से बचाव की जरूरत भी अधिक है.डायरिया के कारण बच्चों और वयस्कों में अत्यधिक निर्जलीकरण(डिहाइड्रेशन)होने से समस्याएं बढ़ जाती है. इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से बचा जा सकता है. विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।