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बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला से ज़ुल्फ़िकार मोबाइल वाणी के माध्यम से ये बता रहे हैं,कि सोशल मीडिया पर जानकारियों का खजाना होता है, पर उन्हीं जानकारियों के बीच कुछ अफवाहें ऐसी भी होती हैं जो लोगों के मन में भ्रम पैदा करती हैं। जबकि ऐसे भ्रम या अफवाह का कोई वैज्ञानिक या तार्किक आधार भी नहीं होता। कुछ ऐसा ही भ्रम सेाशल मीडिया के माध्यम से कोरोना वैक्सिन को लेकर फैलाई जा रही है। जिसका खंडन प्रेस इंफोरमेंशन ब्यूरो ने भी किया है। दरअसल सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडिया में कहा जा रहा था कि कोरोना वायरस की वैक्सिन मनुष्यों के डीएनए में ही परिवर्तन कर देगा।कोरोना वैक्सिन का मनुष्यों के डीएनए से किसी भी तरह का कोई सम्बन्ध नहीं है। विश्व स्वास्थ संगठन ने बताया है,कि कोविड टिकाकरण जब तक आम लोगों तक नहीं पहुँचता है तब तक लोगो को विशेष सावधानी की जरुरत है। देश और राज्य में कोविड से सम्बंधित आंकड़े कम हुए है पर ख़त्म नहीं इस लिहाज से भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूररी है जहाँ तक हो सके घर से बहार तभी निकले जब जरुरी काम हो ,नये वर्ष के उत्साह में कहीं भी बहार जाने से पहले सुरक्षात्मक उपायों पर अमल जरूर कर लें।
बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला से ज़ुल्फ़िकार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है,कि नाटापन के अभिशाप से बिहार के 5% से अधिक बच्चों को मिली निजात कुपोषण सिर्फ शारीरिक या मानसिक रूप से बच्चों को कमजोर नहीं करता, बल्कि इससे देश का विकास भी बाधित होता है. लेकिन कोरोना जैसे महामारी के दौर में बिहार में बच्चों के सुपोषण में बढ़ोतरी की खबर राहत पहुंचा रही है. हाल में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार विगत पांच सालों में राज्य में नाटापन( उम्र के हिसाब से लम्बाई का कम होना) में 5.4% की कमी दर्ज हुयी है, जो यह दर्शाती है कि सरकार की पोषण संबंधी योजनाओं का समुदाय स्तर तक बेहतर क्रियान्वयन हुआ है।
मीनापुर प्रखंड के प्रखंड परियोजना प्रबंधक सुधीर कुमार राव ने जीविका की पशु सखी योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
बिहार राज्य के जिला मुजफ्फरपुर से ज़ुल्फ़िकार मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि ठंड बढ़ने के साथ बच्चों के स्वास्थ्य समस्याओं का ध्यान रखना बहुत अधिक जरूरी है. सर्दी, जुकाम के अलावा ठंड में दस्त की भी शिकायत होती है. सर्दी के मौसम में होने वाली दस्त को कोल्ड डायरिया के नाम से जाना जाता है. ठंड के दिनों में बच्चे भरपूर मात्रा में पानी नहीं पीते, साथ ही उन्हें सर्दी जुकाम हो जाता है और वे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ जाते हैं. समय से कोल्ड डायरिया का प्रबंधन नहीं होने से बच्चे सुस्त पड़ जाते हैं और यह उनके लिए नुकसानदेह साबित होता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु का दूसरा सबसे मुख्य कारण डायरिया है.डायरिया में शिशुओं को भरपूर स्तनपान कराना जाना जरूरी है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
गर्भावस्था हर महिला के लिए बहुत खास पल होता है। इस दौरान उनके शरीर में कई शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक बदलाव आते हैं। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। इसका कारण है कि उनको खुद के साथ अपने गर्भस्थ शिशु का भी ख्याल रखना पड़ता है। ऐसे में शरीर को अतिरिक्त पोषक तत्वों, विटामिन्स और मिनरल्स की जरूरत होती है। आमतौर पर हर कोई चाहता है कि डिलीवरी नॉर्मल ही हो, लेकिन कई बार किसी जटिलता के कारण तो कभी गर्भवती महिलाओं के दर्द न सह सकने की वजह से सिजेरियन डिलीवरी की जरूरत पड़ती है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बिहार राज्य के मुजफ्फरपुर जिला के ग्राम फतेहपुर से साबरा खतून मोबाइल वाणी के माध्यम से ये कहना चाहतीं है,किवो सहमत हैं ,कि मुन्नी के पापा ने सही पढ़ाया लिखाया है
