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मुजफ्फरपुर के सरौरा पंचायत की सलीमा खातुन बताती हैं कि जरूरत पड़ने पर जीविका से पैसा निकालकर हम अपना काम करते हैं। फिर पैसा वापस कर देते हैं। ऐसे में आसानी से हमारा काम चल जाता है। हमारा समूह अच्छा चल रहा है।

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