तीन बार मौत के मुंह से वापस आ गया अंकित - तीन बार चमकी से ग्रसित हो चुका है अंकित - तीनों बार सरकारी अस्पतालों ने बचायी है जान - फॉलोअप में ड्राई फूड का पैकेट लाते हैं डॉक्टर मुजफ्फरपुर : एक कहावत है-जाके राखे साईयां मार सके न कोई। इस कहावत को मीनापुर प्रखंड के घोसौत गांव के अंकित की जिंदगी ने तब से साकार किया है, जब उसकी उम्र चार दिन की थी। दो बार चमकी की चपेट में आया, लेकिन भगवान ने बचा लिया। अभी वह चार साल का है। पिछले महीने वह फिर इस जानलेवा बीमारी की जद में आ गया। इस बार हालत और भी नाजुक हो गई, लेकिन इस बार बच्चे के पिता और चाचा की जागरुकता ने बच्चे की जान बचा ली। बात 14 मई की सुबह की है। अंकित के मुंह से झाग आने लगा, शरीर ऐंठने लगा। अंकित के चाचा लखीन्द्र कहते हैं कि सुबह 8 बजे मुझे घर से कॉल आया कि अंकित में चमकी का लक्षण दिख रहा है। मैं जल्दी से वहां आया। देखा तो उसके मुंह से झाग निकल रहा था और शरीर ऐंठ रहा था। यह लक्षण देखते ही मैं इसे मोटरसाइकिल से लेकर मीणापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गया। स्थिति तब और भयानक हो गयी, जब वह रास्ते में ही बेहोश हो गया। मीनापुर के चमकी वार्ड में उसका 2 घंटे ईलाज चला। अस्पताल से ही एम्बुलेंस में अंकित को एसकेएमसीएच भेजा गया, जहां जांच में उसे एईएस की पुष्टि हुई। इलाज के बाद अस्पताल से 8 दिन में उसे छुट्टी मिली।
