बच्चों के बुखार को नज़रअंदाज़ न करें, एईएस के लक्षणों से रहें सतर्क मुज़फ़्फ़रपुर : बच्चों के बुखार को अब हल्के में ना लें। आपकी जागरुकता नौनिहालों को नई जिंदगी दे सकती है। एईएस के लक्षण हों तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर से दिखाएं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सामान्य और चमकी बुखार में फर्क क्या है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार किसी भी साधारण या वायरल बुखार में शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसका असर दो से चार दिन तक रहता है। इसकी शुरुआत बदन टूटने व थकान से होती है। कंपकंपी व चक्कर आना भी सामान्य बुखार के लक्षण हो सकते हैं। वहीं चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज़ बुखार चढ़ा ही रहता है। बदन में ऐंठन होती है, बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमज़ोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा, जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है। डॉक्टरों के अनुसार चमकी बुखार से ग्रस्त बच्चों में पानी और हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर की कमी देखी जा रही है। मस्तिष्क का ज्वर संक्रामक नहीं होता है, लेकिन ज्वर पैदा करने वाला वायरस संक्रामक हो सकता है। चमकी बुखार 15 साल तक के बच्चे को अपनी चपेट में ले रहा है
